Gumla : गुमला की एक शांत-सी शाम में जब सूरज खेतों के पीछे सिमट रहा था, तभी तीन चेहरों ने अंधेरे को अपने पाप का पर्दा बना लिया। 17 जुलाई की वो शाम एक मासूम के जीवन की सबसे डरावनी रात बन गई। न जाने वो कौन-सी राह थी, जहां न इंसानियत थी, न रहम। अनूप, पंकज और बलराम तीन नाम, तीन चेहरे, और एक हैवानियत। एक सुनसान मैदान, एक नाबालिग लड़की और बारी-बारी से टूटती उसकी अस्मिता। गुमला थाना में मामला दर्ज हुआ और फिर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। SDPO सुरेश प्रसाद यादव के निर्देशन में बनी टीम ने जैसे ताबीज की तरह उस मासूम की टूटी उम्मीदों को जोड़ा। कड़ाई के पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी अनूप उरांव ने कबूल किया कि 17 जुलाई को उसने पंकज और बलराम के साथ मिलकर एक नाबालिग लड़की को सुनसान स्थान पर ले जाकर बारी-बारी से दुष्कर्म किया और फिर वहीं छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक स्कूटी भी जब्त की है, जिसका उपयोग घटना में किया गया था। शनिवार को तीनों संदेही गुनहगारों को जेल भेज दिया गया।
छापेमारी दल में शामिल अधिकारी
महेंद्र कुमार करमाली, उपनिरीक्षक-सह-थाना प्रभारी, गुमला
विनय कुमार महतो, सब इंस्पेक्टर
बबीता कुमारी, सब इंस्पेक्टर
गुमला थाना के सशस्त्र बल





