Kohramlive : त्वचा में खुजली, खुस्की, लालिमा जैसे दाग या घाव को कभी-कभी हल्के ढंग से लेना घातक हो जाता है। त्वचा के कुछ घाव अंदरूनी बीमारियों का संकेत भी हो सकते है। डॉक्टरों का कहना है कि खुजली, लालिमा या ड्राई स्किन जैसी समस्याएं रक्त संचरण की दिक्कतों के कारण भी हो सकती है। BAU के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ यूएस वर्मा का कहना है कि शुगर जैसी क्रोनिक बीमारियों की स्थिति में त्वचा से संबंधित विकारों का खतरा बना रहता है। डायबिटीज पेशेंट को ब्लड शुगर कंट्रोल रखना चाहिये। अन्यथा इसके घातक परिणाम भी हो सकते हैं।
डायबिटीज वाले लोगों में त्वचा पर छाले होने की दिक्कत काफी आम है, इसमें पैर की उंगलियों, पैरों में छाले, हाथों की उंगलियों में छाले होने लगते हैं। यह छाले दर्द नहीं देते और 15-20 दिनों में अपने आप ठीक भी हो जाते हैं। ये छाले इस बात का संकेत हो सकते हैं कि शुगर कंट्रोल में नहीं है। इसपर गौर जरूरी है। शुगर पेशेंट में डिजिटल स्केलेरोसिस होने का खतरा भी बना रहता है। जिसमें त्वचा सामान्य से मोटी हो जाती है। टाइप-1 और टाइप-2 दोनों प्रकार के डायबिटीज के शिकार लोगों में ये समस्या हो सकती हैं। हाथों के पीछे या उंगलियों या पैर की उंगलियों पर त्वचा मोटी और मोम नुमा हो सकती है। अगर ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित नहीं रहता है तो इस रोग के विकसित होने का जोखिम अधिक होता है।
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