नई दिल्ली : पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की साजिश में शामिल ए जी पेरारीवलन को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। वह 32 साल की सजा काट चुका है। अदालत ने उसे अच्छे आचरण, शैक्षिक योग्यता और बीमारी के आधार पर जमानत दी। इस मामले में 7 लोगों को उम्रकैद हुई थी। इनमें से 6 अभी जेल में हैं। पेरारिवलन ने अपनी याचिका में कहा कि तमिलनाडु सरकार उसकी रिहाई का आदेश दे चुकी है, लेकिन राज्यपाल और केंद्र सरकार इसे मंजूर नहीं कर रही।
न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ आरोपी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में आरोपी ने एमडीएमए जांच पूरी होने तक इस मामले में उम्रकैद की सजा को स्थगित करने की मांग की गई थी।
राजीव गांधी की हत्या के मामले में मई 1999 के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने चार दोषियों पेरारीवलन, मुरुगन,संथम और नलिनी की मौत की सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी को सुनवाई करते हुए राजीव गांधी की हत्या के मामले में दोषी पेरारीवलन की मौत की सजा को दो अन्य कैदियों संथम और मुरुगन के साथ उम्रकैद में बदल दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसका आधार उनकी दया याचिका पर फैसला करने में 11 साल की देरी होने को बनाया था।
एजी पेरारिवलन राजीव गांधी हत्याकांड में सजा काट रहे चार दोषियों में से एक है। राजीव गांधी हत्याकांड में पेरारिवलन के अलावा संतन, मुरुगन और नलिनी दोषी हैं। मुरुगन नलिनी का पति है। तमिलनाडु के श्रीपेरम्बुदूर में एक चुनावी रैली के दौरान 21 मई 1991 में लिट्टे के आत्मघाती हमले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या हुई थी।












