Hazaribagh (Sunil Sahu) : नल है तो पानी नहीं, पोल है तो बिजली नहीं, स्कूल है तो टीचर नहीं, आगनबाड़ी और अस्पताल का दूर -दूर तक कोई ठिकाना नहीं। रात में कोई बीमार पड़ जाए तो उस परिवार पर आफत आ जाती है। खटिया पर पेशेंट को बोहकर मीलों पैदल ले जाया जाता है। गांव में न अस्पताल है, न एम्बुलेंस। सबसे ज्यादा कष्ट तब होता है जब किसी आंगन में बहू या बेटी को प्रसव पीड़ा शुरू होती है। गांव का रास्ता उतना ही ऊबड़ खाबड़ और गड़बड़ है। शासन प्रशासन के जिम्मेदार लोगों को बोलकर थक गये गांव का अबतक कुछ भी भला न हो सका।
डराते रहता है हाथी का तांडव
अब तो आलम यह है कि डर भय के साये में रतजग्गा करने को मजबूर है। रात के अंधेरे में जंगली हाथी का तांडव डराते रहता है। अब तक न जानें कितनों को हाथी मार चुका है। लहराते फसल को रौंद देता है, कई घरों को पूरी तरह से बर्बाद कर देता है। यह हाल है हजारीबाग के बड़कागांव पंचायत चेपा कलां के पंदनवा टांड़ गांव का। सबसे दुख तब होता है जब कान में सुनाई यह देता है जब कोई यहां अपना बेटा बेटी को ब्याहना नहीं चाहता है। वहीं इस बाबत बड़कागांव के प्रखंड विकास पदाधिकारी जितेंद्र कुमार पांडे ने कहा कि मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं था मैं जल्द ही इस पर टीम बनाकर जो भी सुविधा मुहैया करा सकता हूं कराने की कोशिश करूंगा। सुनें क्या बोले गांववाले…
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