Kohramlive : नोटिफिकेशन की टन-टन, स्क्रीन की चकाचौंध और हर पल ऑनलाइन रहने की आदत, आज हमारा दिमाग कभी सच में “ऑफ” ही नहीं होता। लेकिन क्या हो अगर आप कुछ समय के लिये इस मोबाइल(Mobile) के शोर से दूरी बना लें? वैज्ञानिक कहते हैं कि यहीं से शुरू होती है दिमाग की असली मरम्मत। न्यूरोसाइंस के अनुसार, जब हम मोबाइल(Mobile), टीवी और गैजेट्स से दूर होते हैं तो दिमाग को गहरा आराम मिलता है।
केवल 2 घंटे खुद रखे Mobile से दूर
यह केवल थकान नहीं मिटाता, बल्कि, नई ब्रेन सेल्स बनने में भी मदद करता है। इससे याददाश्त मजबूत होती है। हमारे दिमाग का एक हिस्सा हिप्पोकैंपस है। यहीं पर नई यादें बनती हैं और पुरानी मजबूत होती हैं। डिजिटल शोर इसे कमजोर करता है। जबकि शांति इसे ताकत देती है।
दिमाग का ‘रीसेट बटन’
विशेषज्ञ बताते हैं कि रोज कुछ समय की शांति दिमाग को “रीसेट” करने का काम करती है। इस प्रक्रिया को न्यूरोजेनेसिस (नई कोशिकाओं का निर्माण) कहा जाता है। इससे एकाग्रता, याददाश्त और भावनात्मक संतुलन बढ़ती है। लगातार म्यूजिक या बैकग्राउंड नॉइज दिमाग को सिर्फ अस्थायी उत्तेजना देता है, असली आराम नहीं मिल पाता और मानसिक थकान बनी रहती है।
आसान है डिजिटल डिटॉक्स
रोज कुछ समय निकालें, मोबाइल(Mobile), टीवी, लैपटॉप से दूरी बनायें और किसी शांत जगह पर अकेले बैठें। शुरुआत में अजीब लगेगा, लेकिन धीरे-धीरे यही सुकून अच्छा लगने लगेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह छोटी-सी आदत लंबे समय में बड़ा बदलाव ला सकती है।
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