Kohramlive : महाअष्टमी कल और महानवमी 1 अक्टूबर को है। इन दोनों तिथियों में शुभ संयोग बन रहा है। माता रानी हर मन्नत पूरा करेगी। पहले मुहूर्त सुबह 5.01 से 6.13 बजे तक है। दूसरा मुहूर्त 10.41 से 12.11 बजे तक एवं अभिजीत मुहूर्त 11.47 से 12.35 बजे तक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हवन कुंड को साफ करें और गंगाजल छिड़कें। आम की लकड़ी, घी और कपूर से अग्नि प्रज्वलित करें। देवी दुर्गा का ध्यान करते हुये कम से कम 108 बार आहुति डालें। शेष सामग्री को पान के पत्ते में रखें, उसमें पूरी, हलवा, चना, सुपारी और लौंग डालकर आहुति अर्पित करें। अंत में माता की आरती करें और भोग लगायें।
कन्या पूजन का विधान
- कन्याओं को एक दिन पहले आमंत्रित करें।
- उनके पांव को जल, दूध और पुष्पजल से धोकर तिलक करें।
- भोजन करायें और उपहार देकर चरणों को छूकर आशीर्वाद लें।
महत्त्व
- घर में सुख-समृद्धि आती है।
- हवन और पूजा से पूरे वर्ष के लिए सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य मिलता है।
- 108 आहुति और देवी दुर्गा का ध्यान अत्यंत आवश्यक।






