रांची : कोहराम लाइव द्वारा 25 लाख का ईनामी एवं पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप की पहली तस्वीर फ्लैश की गयी थी, जिस पर रांची के ग्रामीण एसपी मो नौशाद आलम ने मुहर लगा दी है और कहा कि निश्चित रूप से यही है दिनेश गोप।
वहीं कोहराम लाइव पर दिनेश गोप की आपराधिक गाथा दिखाये जाने के बाद रविवार को सोशल मीडिया में एक शख्श ने जो कुछ पोस्ट किया है, उससे पुलिस को एक बार फिर गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। फेसबुक पर डाली गयी एक पोस्ट में लिखा है- “जिसे दिनेश गोप बताया जा रहा है, वो वास्तव में नहीं है। यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि ये गुज्जू गोप है, दिनेश का राइट हैंड। ये तस्वीर 2017 की ही है, जब बानो में मुठभेड़ हुई थी और एक दारोगा शहीद हो गये थे। घटना के बाद हम लोग वहां गये थे, मुठभेड़ वाली जगह। जहां पुलिस ने पोस्टर लगाये थे।“ शासन-प्रशासन की इस भयंकर चूक को उसी दिन सही मंच पर लाकर बेनकाब कर देना चाहिए था। तब शायद पीठ भी उसकी थपथपायी जाती।
यहां सिर्फ एक सवाल, अगर मौके पर जाने वाला शख्स जिम्मेवार नागरिक है, तो उसे राज्य सरकार की इस चूक को उजागर करना चाहिये था कि जिसे दिनेश गोप बता रही है, दरअसल वह गुज्जू गोप है।
सच्चाई यह है कि गुज्जू गोप अपने दो साथियों के साथ कामडारा में कब का मारा गया। उसके “वास्तव” शब्द से ये जगजाहिर है कि वह दिनेश गोप को काफी करीब से जानता और पहचानता है। दिनेश गोप एक ऐसा आतंक है कि उसके गांव का कोई भी उसका नुकसान नहीं चाहेगा।
वहीं इससे पहले न तो प्रिंट, न इलेक्ट्रोनिक, न सोशल मीडिया में दिनेश गोप की तस्वीर छपी, न दिखाई गयी। आखिर 2017 से इसे दबा-छुपा कर क्यों रखा गया? जिम्मेवार होते तो उसे ब्रेक कर वाहवाही बटोरते कि पहली तस्वीर मैंने छापी।
पिछले ढाई दशक से परेशान पुलिस को हमेशा गलत सूचना ही देकर गुमराह किया जा रहा है। इन्हें पुलिस अपनी भाषा में पनाहगार, मददगार मानते हुए गुनाहगार मान कानून सम्मत कार्रवाई भी करती है।
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