Ranchi(Akhilesh Kumar) : राजधानी रांची से सटे नामकुम के हुवांगहातु जंगल से अब डर की एक नई दस्तक है। पहले गाय मरी, फिर बछड़ा और अब, लाली के जंगल तक बाघ का साया आ पहुंचा है। तीन जानवर, एक ही रात, गर्दन पर वही पंजे, वही खरोंचें और गांव में फिर एक बार लौट आया डर का मौसम!। गरूरपीड़ी हो या जोगीटोली, हर गांव के दरवाजे अब शाम होते ही बंद हो जाते हैं। ग्रामीण पारंपरिक हथियारों से रतजगा कर रहे हैं, एक आंख सोती है, दूसरी बाघ की राह तकती है। किसी की आंखों में नींद नहीं, किसी की गोद में चैन नहीं। बाघ की मौजूदगी ने ग्रामीणों के दिलों में दहशत का जंगल उगा दिया है। बाघ की तलाश में वन विभाग है, लेकिन बाघ खुद तलाश रहा है, शिकार। भाजपा नेत्री आरती कुजूर मौके पर पहुंची और जंगल का जायजा लिया। स्थानीय नेताओं ने आवाज उठाई है, जंगल में गश्ती हो, कैमरे लगें, और गांव वालों को राहत मिले। रेंजर गायत्री देवी ने कहा कि “मवेशी के शव को उसी स्थान पर छोड़ दिया गया है, ताकि बाघ की पहचान हो सके। अब तक कोई पदचिन्ह स्पष्ट नहीं हैं। अगर कोई हलचल दिखे तो तुरंत सूचना दें, पटाखे रखें, हम बाघ को चिन्हित करने की कोशिश कर रहे हैं।” कहते हैं कि बाघ के नाम से कईयों ने अपने बेटों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है, वहीं कईयों ने मवेशी को छूट्टा घूमने से रोक रखा है। महिलाएं खेत की मेढ़ तक नहीं निकलतीं। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि सबसे पहले हुवांगहातु जंगल में बाघ की झलक देखी गई। मवेशियों पर हमले, शरीर पर गहरे पंजों के निशान। बीते रविवार, कुदागड़ा जंगल (हुवांगहातु से लगभग 10 किमी दूर) में तीन मवेशी मृत पाये गये। गरदन और शरीर पर ताजा पंजे के घाव मिले। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि दो बाघ हैं, तभी तो इस कदर आतंक मचा है। गरूरपीड़ी, हेसो, फतेहपुर, जोगीटोली, नीमटोली, कुदागड़ा और आसपास के तमाम गांवों में डर ने डेरा डाल लिया है। गर्मी की रातों में भी खिड़कियां बंद, दरवाज़े बंद और मन में डर।
नामकुम के जंगल में बाघ की आहट!#Ranchi #Namkum #Tiger #Forest #Jharkhand pic.twitter.com/FLjQeuE2of
— KohramLive (@KohramLive) June 15, 2025








