रांची : जेल परिसर के बाहर इलाज करा रहे कैदियों के साथ उनकी देखभाल के लिए रखे जाने वाले निजी अटेंडेंट को लेकर जेल प्रशासन की ओर से तैयार एसओपी को गृह विभाग ने मंजूरी दे दी है। एसओपी में एक ओर जहां अटेंडेंट रखे जाने से लेकर अटेंडेंट के चुनाव और उसके आचार एवं व्यवहार को लेकर मापदंड तय किए गए हैं। बता दें कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के अटेंडेंट को लेकर हुए विवाद के बाद जेल प्रशासन ने एसओपी तैयार किया।
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अटेंडेंट को इन बातों का रखना होगा ख्याल
अटेंडेंट को किसी भी परिस्थिति में कैदी के साथ रहने के क्रम में मोबाइल फोन या अन्य इंटरनेट संपर्क वाले डिजिटल मीडिया से संबंधित कोई भी यंत्र नहीं रखना है। बीमार बंदी के साथ केवल घरेलू या चिकित्सा से संबंधित बात ही करनी है। किसी भी स्थिति में राजनैतिक या अपराध करने से संबंधित बातचीत नहीं करनी है। एसओपी में यह भी प्रावधान किया गया है कि बंदी कक्ष में अटेंडेंट द्वारा अनधिकृत रूप से मोबाइल या अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की बरामदगी होती है या फिर बंदी के भागने की स्थिति में अटेंडेंट और सुरक्षा बल के प्रभारी पर एफआईआर दर्ज की जा सकेगी।
अटेंडेंट बनने के लिए ये जरूरी
बीमार बंदी का रिश्तेदार या नजदीकी हो। अटेंडेंट की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं हो। उसके पास भारत की नागरिकता का प्रमाण पत्र और आधार कार्ड होना जरूरी है। उसे फैलने वाली कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए। अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट या डायरेक्टर जरूरी समझेंगे, तो बंदी से उसके परिजनों की जानकारी लेकर दो नाम जेल सुपरिंटेंडेंट को भेज सकते हैं।
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