Kohramlive : जैसे कोई तूफान पहले हवाओं से बात करता है, फिर दरवाजे खटखटाता है और फिर बस्ती हिला देता है। अब भारत की सरकार भी शायद चुप नहीं रहेगी। कुछ बड़ा होने वाला है? इस कयास ने तब हवा पकड़ ली जब सोशल मीडिया में एक फोटो वायरल हुई। वायरल फोटो के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की है। इसके बाद से ही ये बातें पूरे जोर-शोर से वायरल हो रही है कि कुछ बड़ा होने वाला है। इस बैठक ने भारतीय सरकार की पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की दिशा में संभावित कदमों की अटकलों को हवा दी है।
22 अप्रैल की शाम जब पहलगाम की वादियों में इंसानियत लहूलुहान हुई, तो सिर्फ़ 26 ज़िंदगियां ही नहीं गईं, बल्कि एक राष्ट्र की आत्मा भी तिलमिला उठी। और जब अगली सुबह राष्ट्रपति भवन के द्वार पर अमित शाह और एस. जयशंकर एक साथ दाख़िल हुये तो सोशल मीडिया पर बस एक सवाल तैर गया—”क्या अब बदला तय है?” देश के भीतर इस बात को लेकर गुस्सा है कि पाकिस्तान को कठोर संदेश भेजने का वक्त आ चुका है। इस आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है और इसे पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की कार्रवाई माना है।
सियासत के गलियारों में गूंजती फुसफुसाहटें
यह कोई साधारण मुलाकात नहीं थी। गृह मंत्री और विदेश मंत्री का राष्ट्रपति से यूं अचानक मिलना, ऐसे वक्त में जब देश ग़ुस्से में है। कूटनीति के उन पन्नों को पलटने जैसा था, जिनमें हर साजिश का जवाब, हर हमले की चुपचाप तैयारी छुपी होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिंधु जल संधि का पुनर्विचार, पाक उच्चायोग की समीक्षा, सीमाओं पर जवाबी कार्रवाई एवं संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की घेराबंदी, भारत चुप नहीं रहेगा—ये संकेत हैं। अब पाकिस्तान के हर समर्थन को चुनौती मिलने वाली है। वहीं, इस मुलाकात के बाद जितनी जुबां उतनी तरह की चर्चा हो रही है। कुछ लोगों का कहना है कि ये मुलाकात क्या किसी “सर्जिकल संकेत” की आहट है?








