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कोई आगे से, तो कोई पीछे से गोद रहा था…

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रांची : इससे खतरनाक और दुस्साहस क्या हो सकता है दुश्मनों की नापाक इरादों को भांप मेरे पति थाना गए पुलिस को लेकर साथ में आए ताकि कुछ गड़बड़ ना हो। पर ये क्या पुलिस के सामने ही टूट पड़े मेरे पति पर दुश्मन। कोई आगे से कोई पीछे से कर रहा था ताबड़तोड़ वार। कोई चाकू से गोद रहा था तो कोई पत्थर से कूच रहा था। पुलिस बचाने की बजाय पीछे हट गई। इस बीच लहूलुहान पति भागते-भागते अपने घर के दरवाजे के बाहर आकर गिर पड़े। उनकी चीख पर जब मैं बाहर निकली तो नजारा देख मेरे होश उड़ गये। खून से लथपथ जमीन पर गिरे पड़े थे मेरे पति।

आनन-फानन में उन्हें लेकर समर हॉस्पिटल भागी, भर्ती नहीं करने पर गुरूनानक अस्पताल गये। वहां भी एडमिट नहीं लिया। फिर पति को लेकर रिम्स पहुंची, पर रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। दम तोड़ने से पहले सिर्फ एक शब्द कहा कि इन्हें मत छोड़ना। जेल जरूर भिजवाना। उस तारीख से आज तक थाना से लेकर कई बड़े अधिकारियों तक कई बार चक्कर लगाकर थक हार गई, पर आज तक नहीं पकड़े गये मेरे पति के कातिल। वे बेखौफ और छुट्टा घूम रहे हैं। हमने भतीजे के बयान पर नामजद अभियुक्तों के खिलाफ जगन्नाथपुर थाना में एफआईआर दर्ज कराया है।

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अलाउद्दीन 20 दिसंबर रविवार की दोपहर अपने ससुर के साथ पीसीआर लेकर ज़मीन देखने पहुंचा.. ससुर को ज़मीन के कागज़ात का बैग थमाकर बोला कि इसे घर में रख दें, पुलिस ने वहां रह रहे लोगों से जब ज़मीन के कागज़ात की मांग की तो उन लोगों ने लड़ाई शुरू कर दी और पत्थरबाज़ी पर उतर आये। जिस कारण पुलिस पीसीआर पीछे की ओर खिसक गई। जब अलाउद्दीन के ससुर घर पर बैग रख वापस अलाउद्दीन के पास पहुंचे तो देखा कि 20 से 21 लोग जिनमें महिलाएं भी शामिल थी, अलाउद्दीन को घेर लिया और मारपीट करने लगे। उतने में ही दो लड़कों ने अलाउद्दीन को चाकू से गोदना शुरू कर दिया। दोनों लड़कों का नाम पुलिस को बता दिया गया है। पर पुलिस दोनों लड़कों को पकड़ने की आज तक जुर्रत नहीं जुटा पायी है।

वहां खड़ी भीड़ बस हो हल्ला करती रही मगर कोई मदद के लिए नहीं आया.. ससुर ने दामाद को बचाने की कोशिश की तो उसके साथ भी मारपीट करने लगे। किसी तरह जाकिर अलाउद्दीन को बचाकर घर की ओर जाने लगा तो पीछे से कुछ लोग पत्थर फेंक कर मारने लगे। जिसमें उसे काफी चोट भी आई। घर के आंगन में पहुंचते ही अलाउद्दीन वहीं गिर गया। उसकी पत्नी और बाकी परिवार वाले भी बाहर निकल कर हायतौबा करने लगे। नतीजा यह हुआ कि अलाउद्दीन ने अस्पताल जाने के क्रम मे ही दम तोड़ दिया।

शबनम को इंतज़ार है तो बस उस दिन का जब उसके पति के कातिल सलाखों के पीछे जाएंगे। अब देखना बस ये है कि पुलिस अलाउद्दीन के कातिल को पकड़ने में कब कामयाब होती है।

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