Ranchi : महाशिवरात्रि की पावन रात रांची का ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर का नजारा देखने लायक था। शिवभक्तों का जनसैलाब, घंटे-घड़ियालों की गूंज और “हर-हर महादेव” के जयघोष से मंदिर परिसर गूंज उठी। लगभग 70 से 80 हजार भक्तों ने पहाड़ी बाबा पर जलाभिषेक किया। शाम ढलते ही पहाड़ी मंदिर से शिव बारात निकाली गई। भूत-प्रेत, नाग-कन्यायें, अघोरी और साधु-संतों के वेश में भक्तों की टोली शिव की लीला का अद्भुत दृश्य रच रही थी। गाजे-बाजे के साथ निकली यह बारात पूरे शहर से गुजरी और हर गली-मोहल्ले में भोलेनाथ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। भगवान शिव अपने भूत-प्रेतों के साथ ‘कर्पूरगौरं करुणावतारं’ के रूप में नजर आये। पहाड़ी मंदिर की खड़ी चढ़ाई भी आस्था की राह में कोई रुकावट न बन सकी। भोर होते ही हजारों श्रद्धालु गंगाजल, दूध और बेलपत्र लिये कतार में लग गये। हर किसी की आंखों में बस एक ही प्रार्थना—“भोलेनाथ, हमारी झोली खुशियों से भर दो!” महाशिवरात्रि पर पूरा रांची शिवमय हो गया था। कोकर शिव मंदिर, काली मंदिर, देवड़ी मंदिर और अन्य शिवालयों में भजन-कीर्तन के स्वर लहरियां रातभर गूंजते रहे। शहर के कोने-कोने से भक्तजन मंदिरों की ओर उमड़ते रहे। शिव बारात जब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंची, तो आसमान में रंग-बिरंगे गुलाल उड़ने लगे। लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाया और यह एहसास हुआ कि महाशिवरात्रि सिर्फ एक पर्व नहीं, यह प्रेम, भक्ति और समर्पण का एक पावन संगम है।
श्री शिव बारात आयोजन महासमिति, पहाड़ी मंदिर रांची के बैनर तले शिव बारात निकाली गई। पहाड़ी मंदिर से निकलकर पिस्का मोड़ विश्वनाथ मंदिर में शिव-पार्वती का शुभ विवाह संपन्न हुआ। आयोजन का मुख्य आकर्षण भगवान शिव की झांकी थी, जिसमें वे अपने भूत-प्रेतों के साथ ‘कर्पूरगौरं करुणावतारं’ के स्वरूप में नजर आये। बारात के शुभारंभ से पूर्व पहाड़ी मंदिर मुख्य द्वार पर बने मंच से महासमिति के मुख्य संरक्षक सुबोधकांत सहाय, विधायक सी. पी. सिंह, संरक्षक कुणाल अजमानी, कुमार राजा, रंजन कुमार, अध्यक्ष राजेश साहू, और बादल सिंह ने साझा तौर से दीप प्रज्वलित कर शिव-पार्वती की आरती उतारी। शिव बारात का यात्रा मार्ग शनि मंदिर अपर बाजार, शहीद चौक, फिरायालाल चौक, गांधी चौक, महावीर चौक, रातू रोड होते हुये पिस्का मोड़ विश्वनाथ मंदिर तक रहा, जहां सनातनी विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ।
बारात में भगवान शिव के साथ विभिन्न देवी-देवताओं की झांकियां निकाली गईं, जिनमें राम-लक्ष्मण-सीता, राधा-कृष्ण, अयोध्या के राम, मां दुर्गा और महिषासुर मर्दिनी की झांकी मुख्य आकर्षण रही। भूत-प्रेतों की टोली अपने स्वामी की बारात जाने की खुशी में नाचती और तांडव करती नजर आई। मुख्य आकर्षणों में शिव तांडव, 21 लड़कियों द्वारा काली तांडव नृत्य, अघोरियों का तांडव नृत्य, भजन संध्या, छऊ नृत्य, झारखंड की प्रसिद्ध ताशा पार्टी, डीजे एवं मनमोहक प्रेम नृत्य शामिल थे। पांच रथ, जिनमें जीवंत स्वरूप विराजमान थे और 14 से 15 सजी-धजी गाड़ियों के साथ हजारों शिवभक्तों ने इस दिव्य आयोजन में भाग लिया।
इस बारात में विशेष रूप से भिक्षुओं, सपेरों, जोगियों और अघोरियों को आमंत्रित किया गया, जो इस आयोजन में शामिल हुये। आयोजन में प्रमुख रूप से मुख्य संरक्षक सुबोधकांत सहाय, विधायक सी. पी. सिंह, संरक्षक कुणाल अजमानी, कुमार राजा, रंजन कुमार, सुमित सिंह, अध्यक्ष राजेश साहू, राजकुमार तलेजा, दीपक नंदा, बादल सिंह, गगन कुमार, शुभाशीष चटर्जी, उर्मिला चौधरी, स्वप्ना चटर्जी, पूनम जायसवाल, राजीव वर्मा, अमन सिंह, राम सिंह, कुमकुम गुप्ता, अनीश सिंह, कात्यानी जायसवाल, माही, प्रिया, अलका, संवी, अनुष्का, आयुष, प्रिंस, मयंक, श्रेया, रियांश आदि गणमान्य लोग शामिल हुये। बारात मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर भक्तों का स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न प्रकार के प्रसाद और पेयजल की व्यवस्था की गई थी। इस अद्भुत और दिव्य आयोजन के बारे में जानकारी महासमिति के प्रवक्ता बादल सिंह द्वारा दी गई।







