रांची : झारखंड हाईकोर्ट में लालू प्रसाद यादव के जेल मैनुअल उल्लंघन मामले की हुई सुनवाई। कोर्ट ने जेल प्रशासन और गृह विभाग से मांगा जवाब। साथ ही संशोधित एसओपी जमा करने को भी कहा। इस मामले में अगली सुनवाई पांच फरवरी को होगी।
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अगली सुनवाई पांच फरवरी को
पूर्व की सुनवाई में भी अदालत ने जेल अथॉरिटी से जवाब तलब किया था। पिछली सुनवाई के दौरान जेल अथॉरिटी द्वारा दिए गए जवाब से कोर्ट ने संतुष्टि जाहिर की थी। इसके बाद एक बार फिर से अदालत ने जेल प्रबंधन और गृह विभाग से जवाब तलब किया है। लालू के जेल में रहते हुए भी लगातार जेल मैनुअल का उल्लंघन की खबर पर कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
क्या हुआ सुनवाई के दौरान
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से जेल के बाहर कैदियों की सुरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि इसके लिए नियम तय किए गए हैं। जो भी अभिरक्षा प्रभारी होंगे उन्हें रजिस्टर मेंटेन करना होगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि अभी सुरक्षा की क्या व्यवस्था है।
इस पर जेल प्रशासन की ओर से बताया गया कि रिम्स में अभी तीन शिफ्ट में सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति भी की गयी है। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि मजिस्ट्रेट की नियुक्ति क्यों की गयी है। इससे प्रतीत होता है कि ज्यादा भीड़-भाड़ होती होगी। इस पर जेल प्रशासन का कहना था कि भीड़ नहीं होती है। अस्पताल परिसर में यदि कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो उससे निपटने के लिए मजिस्ट्रेट को प्रतिनियुक्त किया गया है।
इस पर कोर्ट ने कहा कि एसओपी में यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस के कोई वरीय अधिकारी निरीक्षण करने जाएंगे या नहीं। इसका प्रावधान क्यों नहीं किया गया है। बाहर से भोजन लाने और मुलाकात करने वालों के बारे में भी स्पष्ट जानकारी एसओपी में नहीं दी गयी है। अदालत ने कहा कि कोई भी एसओपी किसी खास व्यक्ति के लिए नहीं बननी चाहिए।
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