Kohramlive : भारत में एक बार फिर कोरोना के फैलने का खतरा सामने आ गया है। चीन और कुछ अन्य देशों में कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में बुधवार को उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसके बाद मंडाविया ने कहा कि कोरोना अभी गया नहीं है। सभी को सतर्क व सावधान रहना है। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि कोरोना टीकों का बूस्टर डोज या ऐहतियाती खुराक लेना अनिवार्य है। इसे सभी को लेना चाहिए। भीड़भाड़ वाली जगह पर मास्क पहनना जरूरी है। गौरतलब है कि जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, चीन और अमेरिका में कोरोना के नए मामले चिंताजनक तरीके से बढ़ रहे हैं।
केवल 27-28 फीसदी लोगों ने ही लगवाई तीसरी खुराक : डॉ. पॉल
बैठक में शामिल नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने बताया कि देश में सिर्फ 27-28 फीसदी लोगों ने ही अभी कोरोना टीकों तीसरा डोज लगवाया है। यह डोज सबके लिए, खासकर बुजुर्गों के लिए अनिवार्य है। उधर, कोरोना के पॉजिटिव मामलों की जीनोम सीक्वेंसिंग फिर से शुरू की गई है। केंद्र सरकार के आदेश के बाद दिल्ली सरकार के लोकनायक और आईएलबीएस अस्पताल में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पाजिटिव सैंपलों को जुटाया जा रहा है।
“In view of rising cases of #COVID19 in some countries, reviewed the situation with experts and officials today. COVID is not over yet. I have directed all concerned to be alert and strengthen surveillance. We are prepared to manage any situation,” tweets Union Health Minister pic.twitter.com/C2PIygymS6
— ANI (@ANI) December 21, 2022
आईजीआई एयरपोर्ट पर होगी रेंडम जांच
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बार फिर से रेंडम जांच की जाएगी। कोरोना प्रभावित देशों से आ रहे लोगों की अनिवार्य रूप से जांच की जाएगी। इसमें देखा जाएगा कि किसी भी यात्री में कोई लक्षण तो नहीं। यदि किसी में लक्षण पाए जाते हैं तो उसे क्वारंटाइन कर दिया जाएगा।
चीन में ओमिक्रॉन के बीएफ.7 का कहर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि चीन में फिलहाल बढ़े मामलों के लिए ओमिक्रॉन BF.7 सब-वैरिएंट जिम्मेदार है। वहां अगले तीन माह में तीन कोरोना लहरें आने का खतरा है। इससे 80 करोड़ लोग संक्रमित हो सकते हैं और 10 लाख से ज्यादा मौतों की आशंका जताई गई है।
गुजरात में मिला था पहला केस
इस वैरिएंट का खतरा भारत में भी हो सकता है। अक्तूबर में गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर ने देश में इस वैरिएंट के कारण संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि की थी। भारत के अलावा कई यूरोपीय देशों में भी इस वैरिएंट के कारण संक्रमण की पुष्टि की जा चुकी है।
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