Kohramlive : रात जब अपनी काली चुनरी फैला देगी और तारे आंखों में सुरमे की तरह सज जायेंगे, तभी उस स्याह सन्नाटे में चुपचाप उभरेगा Strawberry Moon, एक मीठी याद की तरह, एक रूमानी दस्तक की तरह। इस बार 11 जून को जब ये चांद अपने पूरे शबाब पर होगा, तो लगेगा जैसे खुद चांदनी भी किसी दिल की दहलीज पर दस्तक दे रही हो, पूछ रही हो, “याद है वो पहली बार जब हम दोनों ने मिलकर चांद देखा था?” लेकिन इस बार सिर्फ इश्क ही नहीं, बल्कि परंपरा की गूंज, फसलों की खुशबू और सदियों पुरानी श्रद्धा भी चुपचाप आसमान को देख रही होगी। अमेरिका की आदिवासी जनजातियों ने इस पूर्णिमा को “स्ट्रॉबेरी मून” कहा है, क्योंकि ये वो वक्त होता है जब धरती मीठा फल देती है और आसमान उसका आईना बन जाता है। जून की इस पूर्णिमा की चांदनी, ना तो गुलाबी होगी, ना लाल, लेकिन उसकी चमक में वो मीठापन होगा जो यादों में स्वाद छोड़ जाये। तो 10 से 12 जून के बीच, किसी छत पर, किसी पार्क में
या महज अपनी बालकनी में, बस चुपचाप बैठ जाइये और जब आसमान में चांद आपको देखे तो मुस्कुरा दीजिये, क्योंकि वो चांद, हर दिल की कोई ना कोई अधूरी दास्तां जानता है। Strawberry Moon सिर्फ एक खगोलीय घटना नहीं,
ये वो पल है, जब चांद कहता है ,”चलो, कुछ देर फिर से मोहब्बत कर लें…”
इस रोज देखिये “स्ट्रॉबेरी मून”
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