TRENDING : महाराष्ट्र के नागपुर स्थित नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) के वैज्ञानिकों ने कोविड-19 की जांच के लिए एक नए मेथड विकसित किया है। इसे ‘स्लाइन गार्गल आरटी-पीसीआर विधि’ के नाम से जाना जाता है। इससे तीन घंटे के भीतर परिणाम प्राप्त हो सकेगा। इसका प्रोसेस स्लाइन ट्यूब के साथ गार्गलिंग अर्थात गरारा करने से शुरू होगा।
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स्वाब टेस्टिंग में लगता है अधिक समय
NEERI में इनवायरमेंटल वायरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक का कहना है कि आरटी-पीसीआर की स्वाब टेस्टिंग में काफी समय लग जाता था। यह नई तकनीकी इस मायने में काफी बेहतर मानी जा सकती है। इसमें सैंपल टेस्टिंग के तीन घंटे के भीतर कोरोना का पता चल सकेगा। इस टेस्ट किट में स्लाइन एक ट्यूब होगी।
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इस प्रकार पूरा किया जाएगा टेस्ट का प्रोसेस
कोरोना की जांच के लिए इस स्लाइन को मुंह में डालकर 15 सेकंड तक गरारा करना होगा। इसके बाद उसी ट्यूब में गरारे को थूक कर जांच के लिए दे देना होगा। लैब में वैज्ञानिकों द्वारा विकसित बफर के साथ इसे मिश्रित करके 30 मिनट तक रखा जाएगा। आरटी-पीसीआर परीक्षण के लिए आरएनए प्राप्त करने को इस मिश्रण को छह मिनट के लिए 98 डिग्री पर गर्म किया जाएगा। इसी आधार पर व्यक्ति में कोरोना के मामले की पुष्टि की जाएगी। इस परीक्षण तकनीक को देश में तमाम प्रयोगशालाओं के साथ साझा कर दिया गया है।
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