Kohramlive : आंध्र प्रदेश के छोटे से गांव अनंतपुर से निकलकर 37 देशों, भारत के दर्जनों राज्यों और 7 हजार किलोमीटर से ज्यादा की साइकिल यात्रा करने वाली पर्वतारोही और एडवेंचर एथलीट समीरा खान ग्रामीण भारत की बेटियों के अधिकार, आत्मसम्मान और आजादी की प्रतीक बन चुकी हैं। समीरा ने साइकिल पर देशों की सीमायें पार कीं, कई पर्वत शिखरों पर तिरंगा फहराया और अब गांव-गांव जाकर लड़कियों से सीधा संवाद कर रही हैं। उनका साफ मानना है कि “असली बदलाव शहरों से नहीं, गांवों से आता है।” समीरा कहती हैं कि ग्रामीण इलाकों में आज भी लड़कियों की पढ़ाई रोकी जाती है, फैसले दूसरों के हाथ में होते हैं और सपनों को “हद” में बांध दिया जाता है। वही गांव आज उनकी कार्यभूमि हैं। न कोई बड़ा फंड, न कोई कॉर्पोरेट सहारा समीरा पर्वतारोहण और साइकिलिंग के जरिये खुद ही अपने अभियान को आगे बढ़ा रही हैं। उनका मकसद लड़कियों को पढ़ाई के लिये प्रेरित करना, आत्मनिर्भर बनने का हौसला देना और अपने फैसले खुद लेने की ताकत देना है।
दर्द से ताकत तक का सफर
बचपन में मां-बाप को खोने का गहरा दर्द, लेकिन उसी दर्द को उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। आज वही दर्द हजारों बेटियों के लिये हिम्मत का सबक बन चुका है।समीरा का साफ संदेश है कि “लड़कियां पहले इंसान हैं।उन्हें सपने देखने, उन्हें जीने और अपने फैसले खुद लेने की पूरी आजादी मिलनी चाहिये।”










