Kohramlive : पुलिस की वर्दी(Uniform) जब सड़क पर दिखती है, तो लोगों के मन में भरोसा जगता है। लेकिन उसी वर्दी(Uniform) के भीतर कई रैंक और जिम्मेदारियां छिपी होती हैं। अक्सर लोग SP और SSP को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों के बीच फर्क काफी अहम है। SP यानी Superintendent of Police (पुलिस अधीक्षक)। किसी जिले की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी, थानों और पुलिस बल पर सीधा नियंत्रण एवं अपराध रोकना, जांच की निगरानी करना। आसान भाषा में जिले का पुलिस कप्तान।
SP और SSP का Uniform एक, ताकत अलग
क्या होता है SSP?
SSP यानी Senior Superintendent of Police। बड़े जिलों या संवेदनशील क्षेत्रों में तैनाती। पूरे जिले की पुलिस व्यवस्था पर व्यापक नियंत्रण, बड़े अपराध और अहम फैसलों की जिम्मेदारी, यानी: SP से सीनियर और ज्यादा ताकतवर अधिकारी। SSP का पद SP से ऊंचा माना जाता है। SSP के पास ज्यादा अनुभव और बड़ी जिम्मेदारी होती है। SP जहां जिले को संभालता है, वहीं SSP उसी सिस्टम को और बड़े स्तर पर मैनेज करता है।
ऐसे बनते हैं SP और SSP
Union Public Service Commission की सिविल सेवा परीक्षा से चयन होता है। तीन चरण प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू देने पड़ते हैं। चयन के बाद IPS अधिकारी बनते हैं। पहले ASP/ADSP फिर प्रमोशन के बाद SP बनते हैं। इसके बाद अनुभव के आधार पर SSP बनते हैं। अगर आप पुलिस सेवा में जाना चाहते हैं तो SP से SSP तक का सफर मेहनत, अनुभव और काबिलियत से तय होता है।
वर्दी से कैसे पहचानें?
• SP: अशोक स्तंभ + ⭐ (एक स्टार)
• SSP: अशोक स्तंभ + ⭐⭐ (दो स्टार)
वर्दी एक जैसी, लेकिन स्टार बताते हैं रुतबा।

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