Ranchi : झारखंड में ग्रामीण अधोसंरचना विकास को नई रफ्तार देने के लिये मुख्य सचिव अलका तिवारी जोर दिया और कहा कि समय पर काम पूरा होने से ही नाबार्ड ऋण का अधिकतम लाभ मिल सकेगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई पावर कमिटी की हुई महत्वपूर्ण बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 500 योजनाओं के लिये ₹2921.79 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है, जिसमें से ₹1839.39 करोड़ के ऋण की स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। मुख्य सचिव अलका तिवारी ने स्वीकृत ऋण निकासी और बचे हुये बजट (गैप) को दूर करने के लिये विभागों को तेजी से कार्य करने का निर्देश दिया। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 की संभावित योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि राज्य में ग्रामीण विकास से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाये। इसके तहत पेयजल, सिंचाई, सड़क निर्माण, कृषि मार्केटिंग, ग्रामीण पुलों के निर्माण को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिये गये। बैठक में योजनाओं की तेजी से क्रियान्वयन और वित्तीय उपयोगिता को सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। मुख्य सचिव ने योजनाओं की निगरानी और नियमित समीक्षा के निर्देश देते हुये कहा कि विकास की रफ्तार बनाये रखने के लिये सभी संबंधित विभाग प्रभावी कदम उठायें। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग: ₹1137.53 करोड़ की 18 पेयजल योजनाओं के लिये ₹976.96 करोड़ का ऋण स्वीकृति दे दी गई है। वहीं, पलामू लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट के लिए ₹308 करोड़ का ऋण एवं पीरटांड़ मेगालिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट के लिए ₹461.53 करोड़ का ऋण स्वीकृति मिली है। इसी तरह कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग: 369 गोदाम और मार्केटिंग सेंटर के लिए ₹92.85 करोड़ की स्वीकृति और ग्रामीण कार्य विभाग: 124 पुलों के निर्माण के लिए ₹271.35 करोड़ का ऋण प्रक्रियाधीन है।












