Hazaribagh (Sunil Sahu) : ढाई साल की एक बच्ची की मौत हो जाने के बाद हजारीबाग के क्षितिज नर्सिग होम में खूब हो हंगामा हुआ। हालत इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को आना पड़ा। बच्ची के घरवालों का इल्जाम था कि बच्ची ऋषा भारती को बुखार था। बिना पैसे का 1 घंटे तक बच्ची को छुई तक नहीं, हार्ड-हार्ड सूई दे दी गई। 500 पावर की कई सुई दे दी गई, बच्ची बेहोश हो गई। बिना पूरा पैसा लिये ही डर से बच्ची को रांची ले जाने के लिये रेफर कर दिया गया। बच्ची यहीं मर चुकी थी। ओवर डोज दवाई दे देने के कारण बच्ची की जान चली गई। डॉक्टरों पर अनदेखी और लापरवाही का इल्जाम लगाया गया।
वहीं बच्ची का इलाज कर रहे डॉ विकास कुमार सिंह ने कहा कि बेहोशी की हालत में बच्ची को लाया गया था। उसकी हालत बहुत सीरियस थी। बहुत तेज झटका उसे आने लगा, दवाई दी गई, पर झटका नहीं रुका। बच्ची को उल्टी होने लगी। जब उसकी हालत बहुत बिगड़ गई तो उसे रांची रेफर कर दिया गया। डॉ विकास ने कहा कि यह तो वही परिस्थिति हो गई, आप प्रयास ना करो, मरने के लिये छोड़ दो। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने डॉक्टरों पर लगे इल्जाम को गलत बताया। उनका कहना था कि बच्ची को बचाने की हर संभव कोशिश की गई, पर उसकी हालत बिगड़ते चली गई। उसकी हालत ऐसी हो गई थी कि तुरंत रेफर भी नहीं किया जा सकता था।
ऋषा भारती की मौत हो जाने के बाद उसके घर के लोगों का कहना था कि बुखार से पीड़ित बच्ची को सबसे पहले हजारीबाग के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ विकास कुमार सिंह के क्लीनिक में लाया गया। उनकी सलाह पर दिन के 4 बजे क्षितिज नर्सिग होम में भर्ती किया गया। बिना पैसा जमा किये बच्ची को छूआ तक नहीं गया। बच्ची का परिवार केरेडारी का रहनेवाला है। सुनें क्या बोले बच्ची के परिजन, डॉ विकास और अस्पताल प्रबंधन…
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