Kohramlive : मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर छात्र कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रख रहे हैं, तो BCI को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि छात्रों ने उन्हें पत्र लिखा था। यह उनका निजी संवाद है। ऐसे में BCI द्वारा परिपत्र जारी करना सवालों के घेरे में है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में कानूनी विरोध की अनुमति होनी चाहिये। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दी कि BCI चेयरमैन के पास किसी विशेष बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने की कानूनी शक्ति ही नहीं है। इसलिए पूरा आदेश अवैध था।
क्या था पूरा विवाद?
NALSAR यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने दीक्षांत समारोह में CJI को मुख्य अतिथि बनाये जाने का विरोध किया था। इसके बाद BCI ने छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक और कार्रवाई का सर्कुलर जारी किया था। BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने विवादित आदेश वापस ले लिया है। परिषद ने स्पष्ट किया कि छात्रों के खिलाफ कोई जांच नहीं होगी और इंटर्नशिप में किसी छात्र को परेशानी नहीं आने दी जायेगी।















