Ranchi (Pawan Thakur/Bhawna Thakur) : जमीन कारोबारी जितेन्द्र महतो के जिस बांह में गोली लगी थी, उस बांह के कपड़े में टैटू मार्क (जल जाने का काला धब्बा) का निशान था। वहीं PO (मौका-ए-वारदात) पर पहुंचे सदर के इंस्पेक्टर श्याम किशोर महतो का माथा ठनका। जख्मी जितेन्द्र महतो द्वारा बताई गई दोनों ही बातों में उन्हें दम नहीं लगा। गोली खाने के बाद जितेन्द्र ने पुलिस को बताया था कि स्कूटी से ओवरटेक कर उसपर दूर से तीन गोलियां दागी गई। एक हवाई फायर हो गया, दूसरा उसके हेलमेट में लगी और तीसरा बांह में। वहीं जले कपड़े यह जता रहे थे कि गोली बिल्कुल सटा कर मारी गई है। कपड़े में टैटू मार्क बन गया था। मतलब गोली सटा कर मारी गई थी। करीब से गोली मारने पर जहां गोली लगती है, वहां के चमड़े और कपड़े में जल जाने का काला निशान हो जाता। इसे पुलिसिया भाषा में ब्लैक कैंट भी कहा जाता। वहीं स्कूटी से ओवरटेक करने वाली बात भी अनुसंधान में गलत साबित हुई। वारदात राजधानी रांची के सदर थाना क्षेत्र के चैशायर होम रोड में बीते 29 अगस्त को हुई थी। उस रात चेशायर होम रोड में कोई स्कूटी सवार बुलेट सवार को ओवरटेक नहीं किया था। इसका खुलासा सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद हुआ।
इंस्पेक्टर महतो को संदेह हुआ कि माजरा जरूर कुछ और है। जितेन्द्र महतो के जीवन कुंडली को पहले खंगाला गया। वहीं उसके जानी दुश्मन के बारे में भी पता किया गया। तफ्तीश से खुलासा हुआ कि जितेन्द्र महतो जमीन खरीद बिक्री का धंधा करता है। चेशायर होम में करीब 6 एकड़ जमीन को लेकर उसका कुछ लोगों से लफड़ा चल रहा है। उसके दुश्मन के तौर पर सद्दाम और वीशु का नाम उछलकर सामने आया। घटना की रात का उन दोनों का भी लोकेशन लिया गया। हालांकि वारदात की रात जितेन्द्र ने अपने बयान में शूटरों को नहीं पहचानने का दावा किया था। उसने कहा था दो अनजान लोग उसे गोली मार भाग गये।
सदर के थानेदार श्याम किशोर महतो ने अंदेशा जताते हुए रांची पुलिस कप्तान किशोर कौशल को सबकुछ बताया। घटना की सच्चाई के तह तक पहुंचने की खातिर इस कांड के अनुसंधान में सदर के डीएसपी प्रभात रंजन बरवार, सब इंस्पेक्टर लाल जी, संदीप कुमार रवि, अभिजित कुमार, एएसआई सत्येन्द्र सिंह, सिपाही संदीप कुमार, कृपाशंकर तिवारी प्रमांशू कुमार को झोंका गया। वैज्ञानिक तरीके से अनुसंधान शुरू की गई। मॉनिटरिंग खुद पुलिस कप्तान किशोर कौशल कर रहे थे। इन्वेस्टिगेशन में कई ऐसे तथ्य और प्रदर्श जुटा लिये गये जिससे यह साबित हुआ कि जितेन्द्र महतो ने अपने जानी दुश्मन सद्दाम और वीशु को फंसाने के लिये अपनी जान को खतरे में डाल खुद यह बड़ा खेल खेला। उसने दो पेशेवर शूटरों राहुल गुंजन दत्ता उर्फ गुलची उर्फ माइकल जोरियन और चिराग टोप्पो उर्फ बाबू को हायर किया था। सेफ्टी जगह गोली मारने पर 8 लाख रुपये की एक नई कार देने का सौदा तय हुआ था। राहुल और चिराग को धरा गया। दोनों ने पुलिस के सामने सच्चाई उगल दी। फिर दोनों को जख्मी जितेन्द्र महतो के पास ले जाया गया। तीनों को आमने सामने कर कई बिंदु पर पूछताछ की गई। तब राजू मंडल और अमित महतो का भी नाम उछलकर सामने आया। रांची पुलिस कप्तान कौशल किशोर ने आज पूरे कांड का खुलासा करते हुए बताया कि कैसे जितेन्द्र महतो अपने रास्ते के कांटे को फंसाने के लिये बड़ी साजिश रची। सुनें क्या बोले रांची पुलिस कप्तान कौशल किशोर…
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