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पलामू का रामपुर सहमा, छूट गई बच्चों की पढ़ाई, निषेधाज्ञा लागू…

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Palamu : पलामू के कोयल नदी के किनारे बसा रामपुर गांव इन दिनों डर और दहशत है। दिन में खेत-खलिहान और गलियों में दिखने वाली चहल-पहल गायब है। शाम ढलते ही दरवाजे बंद हो जाते हैं और लोग घरों में दुबक जाते हैं। 23 मई को हुई गोलीबारी की घटना ने सिर्फ एक युवक की जान नहीं ली, बल्कि हजारों लोगों की जिंदगी को भी भय के साये में धकेल दिया है।

12 दिन बाद भी नहीं लौटी गांव की मुस्कान

23 मई को चैनपुर थाना क्षेत्र के रामपुर गांव में जमीन विवाद को लेकर हुई फायरिंग में सकेन्द्र चौधरी की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य लोग घायल हुये थे। घटना को 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन हालात अब भी सामान्य नहीं हो सके हैं। रामपुर समेत आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि हर आने-जाने वाले व्यक्ति पर नजर रखी जा रही है और शाम होते ही पूरा इलाका जैसे सिमटकर घरों में कैद हो जाता है। डर का सबसे बड़ा असर बच्चों पर पड़ा है। जो बच्चे रोज गांव से बाहर जाकर कोचिंग और पढ़ाई करते थे, उन्होंने आना-जाना बंद कर दिया है। अभिभावकों को डर है कि कहीं कोई अप्रिय घटना न हो जाये। नतीजा यह है कि कई बच्चों की पढ़ाई फिलहाल ठप पड़ गई है।

17 एकड़ जमीन बना खूनी संघर्ष की वजह

रामपुर गांव में जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है, वह करीब 17 एकड़ बताई जा रही है। दोनों पक्ष वर्षों से इस जमीन पर अपना-अपना दावा करते रहे हैं। 23 मई को इसी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और गोलियां चल गईं। हैरत की बात यह है कि जिस जगह फायरिंग हुई, वहां से गढ़वा जिले का डंडा थाना महज 500 मीटर की दूरी पर है।

रात में छतों पर पहरा, दिन में डर का सन्नाटा

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में भय का माहौल इतना गहरा गया है कि रात के समय लोग छतों पर चढ़कर पहरा दे रहे हैं। कई परिवारों के पुरुष सदस्य गांव छोड़कर दूसरी जगह चले गये हैं, जबकि घरों में बुजुर्ग महिलाएं और बच्चे ही रह गये हैं।  रामपुर गांव कोसियारा पंचायत के अंतर्गत आता है। गांव की आबादी करीब 1500 है, जबकि पूरे पंचायत क्षेत्र में 6200 से अधिक मतदाता हैं। घटना के बाद केवल रामपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के 12 से अधिक गांव सीधे तौर पर प्रभावित हुये हैं। सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि लगातार गांव पहुंच रहे हैं, लेकिन लोगों के मन से डर अभी तक नहीं निकल पाया है।

तनाव बढ़ा तो प्रशासन ने लगाई निषेधाज्ञा

हालात की गंभीरता को देखते हुये जिला प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। सदर SDO सुलोचना ने 2 जून को आदेश जारी कर एहतियाती कदम उठाये। प्रशासन का मानना है कि दोनों पक्षों की बैठकों, भाषणों और सोशल मीडिया पर हो रही गतिविधियों से तनाव बढ़ सकता है। इसी को देखते हुये प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किया गया है। रामपुर गोलीकांड मामले में पुलिस ने 17 नामजद और 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पूरे मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होती और सुरक्षा का भरोसा नहीं मिलता, तब तक गांव में सामान्य स्थिति लौटना मुश्किल होगा।

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