Kohramlive : सात सितंबर की रात आकाश पर घटित होने वाली खगोलीय घटना का असर रामनगरी अयोध्या की धार्मिक परंपराओं पर भी पड़ेगा। जैसे ही दोपहर 12.57 बजे सूतक शुरू होगा, रामलला के कपाट भक्तों के लिये बंद कर दिये जायेंगे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोपहर बाद से न तो राम मंदिर में दर्शन होंगे, न ही अयोध्या धाम के अन्य मठ-मंदिरों में। परंपरा के अनुसार, चंद्रग्रहण काल में देवालयों के कपाट बंद रहते हैं। ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि इस अवधि में श्रद्धालु घर पर रहकर मंत्र-जप, भजन-कीर्तन और धार्मिक पाठ का आयोजन करें। यही पुण्य लाभ का मार्ग है। चंद्रग्रहण पूरे भारत समेत एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के कई हिस्सों में दिखेगा।
ज्योतिषीय योग और प्रभाव
यह ग्रहण कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में हो रहा है। राहु-चंद्र की युति और सूर्य-केतु की कन्या राशि में स्थिति से विशेष राहु-चंद्र योग बन रहा है। माना जा रहा है कि इसका असर कुछ राशियों, देशों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक पर पड़ेगा। खगोलविद इसे “ब्लड मून” भी कह रहे हैं। समुद्री तूफानों, बाढ़, भारी वर्षा और भूकंप जैसी घटनाओं की संभावना जताई गई है। वहीं, कई देशों में राजनीतिक अस्थिरता और नेतृत्व संकट भी उभर सकता है।
शुद्धिकरण और पुनः दर्शन
ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिरों में विधि-विधान से शुद्धिकरण होगा। इसके बाद 8 सितंबर की सुबह से भक्तजन फिर से रामलला और अन्य देवताओं के दर्शन कर सकेंगे। रामनगरी अयोध्या में चंद्रग्रहण सिर्फ खगोलीय घटना नहीं, बल्कि श्रद्धा और परंपरा का हिस्सा है। सूतक की खामोशी में जब रामलला के कपाट बंद होंगे, तो गली-गली से उठने वाला भजन और आरती ही भक्तों के मन को सांत्वना देगा।
ग्रहण का समय
स्पर्श: रात 9.57 बजे
मध्य: रात 11.42 बजे
मोक्ष: रात 1.27 बजे
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