Mumbai : भारतीय टेलीविजन जगत के प्रमुख निर्माता-निर्देशक और सागर परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने वाले आनंद सागर का मुंबई में निधन हो गया। उनके निधन से फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। वे महान निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर के पुत्र थे और पौराणिक कथाओं को आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत करने के लिये जाने जाते थे। यह सागर परिवार के लिये एक और बड़ा आघात है, क्योंकि 2025 के अंत में उनके भाई प्रेम सागर का भी निधन हो गया था।
2008 की ‘रामायण’ से बनाई अलग पहचान
1987 की कालजयी टीवी श्रृंखला रामायण को भारतीय दर्शकों ने सांस्कृतिक महागाथा का दर्जा दिया था। इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुये आनंद सागर ने 2008 में इसका रीमेक निर्देशित कर नई पीढ़ी के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने उन्नत विजुअल इफेक्ट्स और नए कलाकारों—गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी के साथ इस महाकाव्य को आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। आनंद सागर ने सागर आर्ट्स के बैनर तले कई लोकप्रिय पौराणिक और फैंटेसी धारावाहिकों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें श्री कृष्णा और जय जय जय बजरंग बली जैसे चर्चित प्रोजेक्ट शामिल हैं। सीमित टीवी बजट में भी प्राचीन ग्रंथों को भव्य और आकर्षक दृश्यात्मक रूप देने की तकनीकी समझ के लिए इंडस्ट्री उन्हें खास तौर पर याद करती है।
सागर विरासत के सच्चे संरक्षक
रामानंद सागर के चार बेटों में से एक आनंद सागर ने परिवार के प्रोडक्शन हाउस सागर आर्ट्स में ‘भक्ति सिनेमा’ की गरिमा बनाये रखने के लिये निरंतर काम किया। पिता की विराट सफलता की छाया में रहते हुये भी उन्होंने अपनी विशिष्ट निर्देशन शैली विकसित की और यह सुनिश्चित किया कि सागर परिवार की पौराणिक परंपरा समय के साथ प्रासंगिक बनी रहे। आनंद सागर का अंतिम संस्कार मुंबई के जुहू स्थित पवन हंस श्मशान घाट में किया गया। अंतिम विदाई के दौरान उनके भाई मोती और सुभाष सागर समेत परिवार के सदस्य और सागर आर्ट्स से जुड़े कई कलाकार मौजूद रहे। समारोह सादा और भावुक माहौल में संपन्न हुआ। बॉलीवुड अभिनेत्री पूनम ढिल्लों भी उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने श्मशान घाट पहुंचीं।




