Bihar : बिहार विधानसभा चुनाव में NDA को प्रचंड बहुमत मिला, वहीं, महागठबंधन बुरी तरह पिछड़ गया। खासकर कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। 61 सीटों पर लड़ने वाली पार्टी सिर्फ 6 सीटें जीत सकी और 2020 के मुकाबले उसकी ताकत लगभग एक तिहाई रह गई। कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी पूरे चुनाव में सक्रिय रहे। उन्होंने 7 जिलों में 13 सभायें कीं, जिनमें 51 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया, लेकिन जीत सिर्फ 4 सीटों पर मिली। इस तरह राहुल गांधी का स्ट्राइक रेट करीब 8% ही रहा। राहुल ने चुनाव से पहले ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के तहत 18 जिलों का दौरा भी किया था।
मल्लाह समाज को साधने की कोशिश भी बेअसर
मल्लाह समुदाय के वोटों को आकर्षित करने के लिये राहुल गांधी वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी के साथ तालाब में उतरे थे। 29 अक्टूबर से शुरू हुये उनके प्रचार में कई संयुक्त रैलियां भी शामिल रहीं, पर असर नगण्य रहा। राहुल गांधी की सभाओं वाली सीटों में कांग्रेस को केवल फारबिसगंज, अररिया, किशनगंज, मनिहारी पर जीत मिली।
प्रियंका गांधी ने 21 सभायें कीं, कवर कीं 54 सीटें—जीत सिर्फ 2
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पहली बार बिहार में इतनी आक्रामक चुनावी भूमिका निभाई। उन्होंने तीनों चरणों में 21 सभायें कीं 54 सीटों को कवर किया लेकिन जीत मिली सिर्फ वाल्मीकि नगर और चनपटिया में। प्रियंका की सभाओं का स्ट्राइक रेट भी कमजोर रहा।
कांग्रेस के दिग्गज भी हारे
2020 में 19 सीटों वाली कांग्रेस इस बार 6 सीटों पर सिमट गई। पार्टी के दिग्गज नेताओं को करारी हार मिली। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान, पूर्व मंत्री अवधेश सिंह सभी चुनाव हार गये। कांग्रेस के सिर्फ 2 मौजूदा विधायक आबिदुर रहमान (अररिया) एवं मनोहर प्रसाद सिंह (मनिहारी) अपनी सीट बचा पाये। बिहार में महागठबंधन की हार की सबसे बड़ी वजह कांग्रेस का बेहद कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है। राहुल और प्रियंका गांधी के हाई-प्रोफाइल कैंपेन के बावजूद पार्टी दो अंकों तक भी नहीं पहुंच सकी।












