Ranchi : केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा की अगुवाई में सरहुल के मौके पर रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर पूर्वजों द्वारा स्थापित पुरखौती झंडा आज लगाया गया। बबलू मुंडा ने कहा कि अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित पारंपरिक नेग दस्तूर को बचाने की जरूरत है। यह आने वाले पीढ़ी को जानना जरूरी है, ताकि सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं पारंपरिक व्यवस्था को जाने सके। तीन रंगों के झंडा में ऊपर सफेद, बीच में लाल तथा नीचे हरा रंग है। सफेद रंग का महत्त्व निराकार पवित्र शांति शुद्धता का प्रतीक है। लाल रंग का महत्व क्रांति का प्रतीक है। हरा रंग का महत्व जल जंगल जमीन हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक है। सरहुल के दिन तीन या पांच इनसे अधिक मुर्गे एवं मुर्गी की बलि देते हैं। लेकिन विशेष रूप से सफेद मुर्गी सिंगबोंगा (सृष्टिकर्ता) के नाम से रंगुवा (लाल) (हातुबोंगा) गांवा देवती के नाम से माला मुर्गी (इकीरबोंगा) जल देवता दरहा देशवाली के नाम से लूपिन तांबी मुर्गी (हड़ाम) बूढ़ा बूढ़ी पूर्वजों को खुश करने तथा काली मुर्गी अनिष्ट कारी शक्तियों को शांत करने के लिए बलि दिया जाता है। बबलू मुंडा ने कहा कि हम परंपरागत विधि विधान नेक दस्तूर और आपसी भाईचारा में प्रकृति धार्मिक एवं सांस्कृतिक महापर्व सरहुल मनाएं।
समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने समस्त सरना धर्मावलंबी से अनुरोध किया है कि सरहुल शोभायात्रा में परंपरागत वेशभूषा में एवं अपने अपने वाद्य यंत्र के साथ निकाले। ज्यादा नशे के सेवन से बचें। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से विशाल मुंडा, अरुण मुंडा, विक्की मुंडा, आकाश मुंडा, प्रकाश मुंडा, राहुल मुंडा, शंकर लिंडा, सुरेंद्र लिंडा, कृष्णकांत टोप्पो एवं निखिल मुंडा सहित कई अन्य मौजूद थे।
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