New Delhi : भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद भीम सिंह ने संविधान की प्रस्तावना से धर्मनिरपेक्ष (Secular) और समाजवादी (Socialist) शब्द हटाने की मांग की है। इसके लिये उन्होंने The Constitution (Amendment) Bill, 2025 एक प्राइवेट मेम्बर बिल के रूप में राज्यसभा में पेश किया। उनकी इस पहल ने संसद से लेकर राजनीतिक हलकों तक बहस तेज कर दी है। सांसद भीम सिंह के अनुसार, प्रस्तावना में ये दोनों शब्द मूल संविधान का हिस्सा नहीं थे। इन्हें 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन के जरिये जोड़ा गया। उस समय विपक्ष के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और जॉर्ज फर्नांडिस जेल में थे, इसलिये “लोकतांत्रिक माहौल उपलब्ध नहीं था।” उन्होंने दावा किया कि आपातकाल के दबाव में हुये इस संशोधन पर व्यापक चर्चा या सहमति नहीं बनी। भीम सिंह ने Dr. B.R. Ambedkar का उदाहरण देते हुये कहा कि अंबेडकर के अनुसार भारत का संविधान अपने ढांचे और मूल सिद्धांतों के कारण ही स्वभाविक रूप से धर्मनिरपेक्ष है। इसलिये “अलग से धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़ने की कोई जरूरत नहीं थी।” उन्होंने कहा कि संविधान सभा ने ‘समाजवादी’ शब्द पर चर्चा जरूर की थी, लेकिन इसे शामिल करना आवश्यक नहीं माना गया।
राजनीतिक लाभ के लिये जोड़े गये शब्द
सांसद ने आरोप लगाया कि 1976 में जोड़े गए ये शब्द राजनीतिक तुष्टिकरण की रणनीति का हिस्सा थे। उनके अनुसार समाजवादी शब्द सोवियत संघ को खुश करने के लिये जोड़ा गया। जबकि धर्मनिरपेक्ष शब्द मुसलमानों को साधने के उद्देश्य से जोड़ा गया। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि ये शब्द इतने ही अनिवार्य थे, तो फिर “क्या 1976 से पहले भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं था? क्या नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री की सरकारें सांप्रदायिक थीं?” संसद में पेश इस प्राइवेट मेम्बर बिल को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आगे यह बिल चर्चा के लिये सूचीबद्ध होगा या नहीं, यह सदन की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा, हालांकि किसी प्राइवेट मेम्बर बिल का कानून बन जाना बेहद दुर्लभ है।






