Kohramlive : ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’। जिसके इर्द-गिर्द सियासत की लहरें अपनी मौन स्वीकृति और मुखर अस्वीकृति की छटा बिखेर रही हैं। राज्यसभा की गूंजती हुई दीवारों के बीच जब यह मुद्दा उठा, तो सवालों की बौछार भी हुई और जवाबों की सरगोशियां भी। संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि 47 राजनीतिक दलों ने अपनी राय दी, जिनमें से 32 ने समर्थन किया और 15 ने असहमति जताई। लेकिन लोकतंत्र केवल सियासी गलियारों का नाम नहीं, यह तो जनमानस की आत्मा में बहती विचारों की नदी है। और जब इस नदी की धारा को पढ़ा गया, तो पाया गया कि 83 प्रतिशत आम लोग ‘एक देश, एक चुनाव’ के पक्ष में हैं। भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनी उच्च स्तरीय समिति ने इस विचार की परख की। वेबसाइट, ईमेल और डाक के जरिये जनता की आवाज सुनी गई। 5232 ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं में से 3837 ने इस विचार को समर्थन दिया, 16172 ईमेल में से 83 प्रतिशत लोगों ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का पक्ष लिया। यह आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं, यह उस बदलाव की दस्तक है जो लोकतंत्र के दरवाजे पर धीरे-धीरे पड़ रही है।







