Ranchi (Bero) : कहते हैं दो दिनों की जिंदगी में एक दिन मौत का तय… पर मौत कब और कैसे आयेगी, यह हर किसी के वश में नहीं। बंधनी उरांव को मिली मौत इस बात एहसास करा गई। लगभग 45 साल की बेवा बंधनी अपने गले में धागा से चाबी लटका रखी थी। भोरे-भोर अपने किसी काम से घर से बाहर जा रही थी। मेन गेट में सिकड़ी चढ़ाने के बाद अपने गले में टंगी चाबी से कुंडी में ताला लगा रही थी, तभी उसका पैर फिसल गया। गले में लटकी डोरी ब्रा में फंसते हुए फांसी का फंदा बन गयी और उसकी सांसों की डोर टूट गई। यह सुन लोगों को सहसा यकीन नहीं हुआ, पर यह दृश्य जिसने भी देखा उसके मुख से बस इतना ही निकला, हे भगवान, ऐसी मौत पहली बार देखने को मिली। गले में पहना धागा बन गया फांसी का फंदा। कुछ ग्रामीणों की नजर जब बंधनी पर पड़ी तो इस बात की जानकारी स्थानीय मुखिया नीरज कुजूर को दी गई। खबर पाकर मौके पर पुलिस भी पहुंची। यह अजीबो गरीब घटना राजधानी रांची के बेड़ो थाना क्षेत्र के पुरियो गांव में हुई। मौके पर बेड़ो के थानेदार मनीष कुमार भी पहुंचे।
बेवा बंधनी उरांव को अजीबो गरीबों हालत में मिली मौत की फैली खबर के बाद वहां भीड़ जुट गई। कुछ लोगों के अनुसार पति की मौत के बाद बेवा बंधनी इधर उधर मजदूरी कर किसी तरह अपना और अपने दो बेटों को पाल पोश रही थी। बेटे विष्णु उरांव और नीरज उरांव बेड़ो के एक होटल में काम करते हैं। बंधनी आज भी भोर में कहीं जाने के लिये घर से निकल रही थी। दरवाजा बंद करते समय उसका पैर फिसल गया और वह काल के गाल में समा गई। उसके गले में बंधा धागा फंदा बन गया। बेवा मां की मौत पर उसके दोनों बेटों का रो रो कर बुरा हाल था।
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