हे भगवान, दलाल बने सितमगर, मां हो रही है पागल, बची लड़कियों की लाज, देखें…

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RANCHI : मानव तस्करी के शिकार बच्चे-बच्चियों की घर वापसी और उनकी जिंदगी को संवारने में CM हेमंत सोरेन और उनकी टीम पूरे एक्शन मोड में है। दलालों के हाथ छली, ठगी और बेची गई बच्चियों को खोज खोज कर निकाला और ढूंढा जा रहा है। इसी कड़ी में आज 10 बच्चियों, एक महिला और एक बच्चे को दिल्ली से मुक्त कराया गया। महिला और सारी बच्ची पश्चिम सिंहभूम और बच्चा सिमडेगा का रहनेवाला है। झारखंड की भोली भाली बच्ची और महिला को बेहतर जिंदगी देने का झांसा देकर उन्हें दिल्ली ले जाया जाता है। वहां उनके साथ जो कुछ होता या बीतता है, उसे सुन कलेजा दरक जाता है। हालत इतनी खराब है कि कुछ लोग तो अपना दिमागी हालत तक खो देते। अपनी संतान तक को नहीं पहचान पाती। ऐसा ही एक वाक्या अभी हाल में हुआ।

एकीकृत पुनर्वास संसाधन केंद्र नई दिल्ली की नोडल ऑफिसर नचिकेता ने खुलासा किया कि अनु ( बदला हुआ नाम ) की मां को दिल्ली लाया गया था। तब वह गर्भवती थी। उसका दिमागी हालत खराब हो गया। इसी अवस्था में उसने दिल्ली में एक बेटी को जन्म दिया। जन्म के बाद वह अपनी बेटी को पहचान तक नहीं सकी। दिल्ली पुलिस ने मां को शॉर्ट स्टे होम और बेटी को बाल कल्याण समिति के हवाले कर दिया। बच्ची वेलफेयर होम में रह रही थी। मां का इलाज हुआ। करीब एक साल तक इलाज चला। एक साल बाद उसे अपनी बेटी का ख्याल आया। पश्चिम सिंहभूम जिला प्रशासन के की मदद से मां-बेटी को मिलाया गया। अब दोनों को एकीकृत पुनर्वास संसाधन केंद्र की टीम के साथ झारखंड भेजा जा रहा है।

इधर, मुक्त कराई गई बच्चियों में एक केवल 8 साल की है। पिता के साये से वंचित इस बच्ची के चार भाई बहन हैं, इनमें दो भाई बहनों का कुछ अता पता नहीं। एक भाई अपने चाचा के साथ रहता है। 8 साल की इस मासूम बच्ची को करीब 1 साल पहले दिल्ली में बेच दिया गया था। वहीं सुनीता एवं रेखा दोनों ( बदला हुआ नाम ) को मानव तस्करों के चंगुल से दूसरी बार छुड़ाया जा रहा है । दलालों के हाथ बिकी बच्चियों का शारीरिक और मानसिक दोनों तरह का शोषण किया जाता है। कई बच्चियों का यौन शोषण करने को लेकर दिल्ली के थानों में केस भी दर्ज है।

पश्चिम सिंहभूम जिले के जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अनीशा कुजूर एवं जिला बाल संरक्षण के शरद कुमार गुप्ता की टीम द्वारा मुक्त कराई गई 10 बच्चियों एवं एक महिला और एक बच्चे को दिल्ली से स्कॉट किया गया । सभी को ट्रेन से लाया गया। हेमंत सरकार ने समाज कल्याण विभाग को सख्त आदेश दिया है कि इन बच्चियों को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाये, ताकि बच्चियां पुनः मानव तस्करी की शिकार न हो जाये।

गौरतलब है कि स्थानिक आयुक्त मस्तराम मीणा के निर्देशानुसार एकीकृत पुनर्वास-सह-संसाधन केंद्र, नई दिल्ली के द्वारा लगातार दिल्ली के विभिन्न बालगृहों को झांका जा रहा है, ताकि मानव तस्करी के शिकार, भूले- भटके या किसी के बहकावे में फंसकर दिल्ली आ गये लोगों को वापस भेजने की कार्रवाई की जा रही है। मानव तस्करी में लगे कुछ दलालों को भी चिहिंत किया गया है। बहुत जल्द इनके खिलाफ ठोस और सख्त कार्रवाई करने की योजना बनाई जा रही है।

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