UP(Neeraj Thakur) : रात के 11 बज रहे थे। हॉस्पिटल की खामोश दीवारों के बीच एक मासूम सी आवाज गूंजी, “मां, आज यहीं रुकूंगी… सुबह आते ही तुम्हारे हाथ की चाय पीऊंगी…” यह ममता की आखिरी कॉल थी, एक बेटी की अपनी मां से सीधी, सीधी सी बात। मगर कौन जानता था कि ये चाय अब उसकी तेरहवीं पर बनेगी। टेमा रहमत के ‘संस हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर’ की इमारत उस रात कुछ कह रही थी… कुछ छुपा रही थी। एक सन्नाटा कमरे की दरारों से रिसता हुआ नीचे हॉल तक चला आया था। कोई था जो उस सीढ़ी से चुपचाप उतरा था… या फिर कोई जो पहले से ही इंतजार में था? सुबह के 7 बजे तक दरवाजा नहीं खुला। जब दरवाजा खोला गया, ममता बेसुध पड़ी थी… गले पर तीन खरोंचें… और टूटी हुई तीन हड्डियां। क्या ये एक ‘प्राकृतिक मौत’ थी, जैसा संचालक रामजी राव कह रहे थे? या फिर एक ऐसी साजिश, जिसमें इंसानियत का गला घोंटा गया? ममता की मौत के पीछे छुपी सारे राज अब पुलिस खोलेगी।

टेमा रहमत का ‘संस हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर’ सुबह की हलचल से दूर एक चुप्पी में डूबा था। नर्स ममता की मौत के बाद CO, ASP और SP सभी मौके पर पहुंचे। पर सवाल वहीं अटका था… रात में नर्स ममता के साथ एक और नर्स ड्यूटी पर थी। पुलिस ने जब उससे सवाल किया, तो उसकी आंखें एक पल के लिये डगमगाईं। “मैं दवा देने के बाद ऊपर चली गई थी, सर। मुझे कुछ पता नहीं चला।” CCTV फुटेज में हॉल के दरवाजे तक कोई आता-जाता नहीं दिखता। तो फिर हत्यारा आया कैसे? यहीं से कहानी मोड़ लेती है…हॉल के कोने में एक पुरानी सीढ़ी थी, ऊपर की ओर जाती हुई। शायद उसी से छत और फिर कमरे तक पहुंचा गया हो। पुलिस ने जब उस सीढ़ी के पास जूते के निशान देखे, तो शक और गहराया। क्या कोई अस्पताल का ही आदमी था? या फिर वो जो अब अस्पताल के आसपास नहीं दिख रहा… फिर आता है संचालक रामजी राव का बयान —”उसकी किडनी में पथरी थी… शायद दर्द से दम टूट गया हो…“मगर पोस्टमार्टम कुछ और कहता है —गला घोंटने से मौत हुई है। और अब, फॉरेंसिक टीम ने वेजाइनल स्वाब भी भेजा है —
क्या यह केवल हत्या थी…या उस मासूम के साथ कुछ और हुआ था…? अस्पताल सील हो चुका है। मरीजों को शिफ्ट किया गया है। पर वो सन्नाटा अब भी वहां पसरा है… और कुछ कहता है…

सिसकियों में दबी सच्चाई
टेमा रहमत की उस रात ने जैसे समय को थाम लिया था। ममता के गले में पड़ी खरोंचें, टूटी हड्डियां और कमरे की चुप्पी… जैसे हर दीवार कुछ कहना चाहती हो, कमरे की दीवार पर ममता की घड़ी अब भी 2.17 पर अटकी हुई थी — क्या वही वक्त था जब उसकी सांसें हमेशा के लिये थम गईं? जांच में सामने आया कि जिस कमरे में ममता थी, वहां हॉल से एक सीढ़ी सीधे छत की ओर जाती थी। उस सीढ़ी पर जंगले का एक पेंच ढीला मिला, क्या कोई छत से उतरा था? या ऊपर से नीचे आया था? जिस रात ममता ड्यूटी पर थी, उसी शिफ्ट में एक और नर्स थी — शालू। उसने पुलिस को बताया कि ममता ने रात को “अजीब सी बात” कही थी, अगर कुछ हो जाये तो मेरी मां को अस्पताल मत आने देना…” क्या ममता को खतरे का अंदेशा था?

CCTV की गुम तस्वीरें
पुलिस ने जब अस्पताल के CCTV की DVR खंगाली तो पाया कि ठीक 1.58 से 2.25 के बीच का फुटेज ब्लैंक है।
रात के सन्नाटे में कैमरे की आंख क्यों बंद हो गई? क्या कोई जानता था कि कहां-कहां कैमरे लगे हैं? अस्पताल संचालक रामजी राव पुलिस कस्टडी में है, मगर अब तक एक भी सीधा जवाब नहीं दे रहा। बस यही कहता है, “मैंने कुछ नहीं किया… वो मेरी जिम्मेदारी थी…मगर सच की परतें उसकी आंखों से अलग कहानी कहती हैं।
ममता की डायरी
टेमा रहमत की उस रात के बाद, जब पुलिस ने ममता के कमरे की तलाशी ली, तो बिस्तर के सिरहाने के नीचे एक पुरानी सी डायरी मिली। गुलाबी कवर, किनारों पर मुड़े हुये पन्ने… जैसे किसी ने इसे कई बार पढ़ा हो… और छुपाया भी हो। पहला पन्ना फड़फड़ाया, और लिखा था: मैं सिर्फ एक नर्स नहीं हूं… मैं एक इंसान हूं… मेरे सपने हैं, मेरे डर भी। लेकिन यहां, इस हॉस्पिटल में… कुछ है जो ठीक नहीं है।”
11 मार्च की रात “आज रात फिर वही बात… राउंड पूरा करने गई तो ICU के बाहर रामजी सर और एक अजनबी में कुछ तेज आवाज में बहस हो रही थी। जब मुझे देखा तो दोनों चुप हो गये। कुछ तो छुपा रहे हैं।”
16 मार्चः “एक और लड़की… सिस्टर रीमा… अचानक रिज़ाइन दे गई। कहती है उसे किसी ने धमकाया। उसे डर था कि कहीं कोई उसे चुप न कर दे। मैंने पूछा तो बस रोने लगी।”
22 मार्चः “रात में एक मरीज आया था… घायल था, लेकिन एंट्री रजिस्टर में नाम नहीं चढ़ा। डॉक्टर साहब ने कहा ‘प्राइवेट केस है’, लेकिन उसकी हालत गंभीर थी… अगले दिन वो नहीं दिखा।”
डर की रातः “मां से कहा है कि अब जल्दी नौकरी छोड़ दूंगी। लेकिन अभी नहीं जा सकती… कुछ ऐसा है जिसे जानना जरूरी है। अगर मुझे कुछ हो जाये तो मेरी डायरी देख लेना… शायद इससे सच्चाई सामने आ सके…”
रीमा की वापसी – डर से थर्राती गवाही
रात का तीसरा पहर था। यूपी के संतकबीरनगर की खामोश गलियों में सिर्फ पुलिस की जीप की चटक सायरन गूंज रही थी। और उसी रात, करीब डेढ़ बजे… एक फोन कॉल आता है। कॉल करने वाली थी — रीमा तिवारी, वही नर्स जो तीन हफ्ते पहले अचानक हॉस्पिटल छोड़कर लापता हो गई थी।“ सर… मैं बहुत डर में हूं। लेकिन ममता को जो हुआ… वो अब चुप नहीं रहने दे रहा… मुझे आपसे मिलना है।”
गुप्त स्थान पर हुई मुलाकात, रीमा ने खोले राज
रीमा कांपते होंठों से बोलती है…“सर, उस अस्पताल में सिर्फ इलाज नहीं होता था… वहां कुछ और भी होता था। दवा के नाम पर रात में कुछ ‘इंजेक्शन’ दिये जाते थे… जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं होता था। और वो ‘स्पेशल मरीज’… जिनका कोई नाम नहीं होता… बस आते थे, और फिर गायब हो जाते थे…”
“ममता ने कुछ देखा था”
ममता ने एक रात CCTV रूम में कुछ देखा था। उसने मुझसे कहा था — ‘रीमा, मुझे लगता है हॉस्पिटल में कुछ गलत हो रहा है। अगर कुछ हुआ, तो मेरी डायरी और CCTV फूटेज को मत छोड़ना।’ फिर… एक रात… मैंने खुद देखा कि डॉक्टर राव एक संदिग्ध आदमी को ‘ओटी’ के पिछले दरवाजे से अंदर ले जा रहे थे… बिना किसी इमरजेंसी या कागज़ के…”
‘स्वैब टेस्ट’, ‘CCTV फुटेज’ और गुप्त दवा का राज़
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रीमा ने बताया कि एक बार उसे एक महिला मरीज का स्वैब लेने का निर्देश मिला, लेकिन न तो मरीज था, और न कोई रजिस्टर एंट्री। अब पुलिस उस स्वैब को मिलान करायेगी ममता के केस से… क्या ममता उस साजिश की गवाह बन गई थी… और उसे इसलिये मौत की नींद सुला दिया गया? अब पुलिस ममता की मौत के पीछे सारे राज को खोलेगी।












