पूरे भारत से 300 से ज्यादा नाथ पंथी औघड़ पीर एवं 100 औघड़ संख्या ढाल में हुए शामिल
रांची : ब्रह्मलीन औघड़ पीर श्री बीर नाथ जी महाराज का संख्या ढाल कार्यक्रम गुरुवार को प्रातः वेदी पूजन से शुरू हुआ। 11 औघड़ों ने बाबा बीरनाथ अघोरी की वेदी का पूजन किया एवं नाथ संप्रदाय की ओर से उन्हें समर्पण भाव दिया। मध्याह्न 1:00 बजे से अन्नाधिवास, फलाघिवास, पुष्पाधिवास, स्नपन एवं शय्याधिवास का पूजन संपन्न किया गया। चंद्र अघोर आश्रम में स्थापित गोरखपीठ में कर्मकांडी ब्राह्मणों एवं नाथ पंथी अघोरियों ने स्थापित की जाने वाली शिव, गणेश एवं बाबा बीर नाथ की मूर्तियों का पहले अन्न, फिर फल फिर, फिर पुष्प एवं गंगा जल में डुबोकर रखा जाता है।

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मान्यता है कि देवलोक में जाने वाले ब्रह्मलीन बाबा बीर नाथ जी को वहां सारी वस्तुएं सुलभ होंगी। यह उनके प्रति समर्पण का भी प्रतीक है, जिसे नाथपंथी संप्रदाय के सभी के लिए निभाया जाता है। 12 के योगी श्री कृष्ण नाथ जी महाराज एवं पीर टिल्लाधीश श्री पारसनाथ जी महाराज द्वारा संख्या ढाल संपन्न कराया गया। शाम 7:00 बजे से संख्या ढाल कार्यक्रम शुरू हुआ। बाबा वीर नाथ जी महाराज के वार्षिकी कर्म की प्रक्रिया इस दौरान निभाई गई। संख्या ढाल का अर्थ ही सामान्य भाषा में बरखी रस्म है। 1 साल पूर्व देह त्याग करने वाले अघोरी बाबा बीर नाथ जी महाराज को सशरीर समाधि दी गई थी। तब से उनकी आत्मा भूलोक पर ही थी। संख्या ढाल के बाद उनकी आत्मा गोलोक प्रस्थान कर जाएगी और उन्हें आवागमन से मुक्ति मिल जाएगी, जो वास्तव में सनातन कामना ही है।

रात्रि 8:00 बजे से गीत और भजन कार्यक्रम शुरू हुआ। इससे पूर्व पुजारी नाथपंथी चंद्र भूषण मिश्र ने नाथ संप्रदाय के इतिहास के बारे में जानकारी दी। शिव के अवतार योगी मत्स्येंद्रनाथ एवं गुरु गोरखनाथ के आविर्भाव के बारे में विस्तार से बताया गया। गीत और भजन कार्यक्रम रात्रि 11:00 बजे तक चला, जिसमें सभी अघोरपंथी योगियों एवं आम लोगों ने अपनी भागीदारी निभायी।
कार्यक्रम में बिहार सरकार के भवन निर्माण एवं शिक्षा मंत्री डॉ अशोक चौधरी, बिहार सरकार के पूर्व मंत्री एवं बिहार विधान परिषद के सदस्य नीरज कुमार, जहानाबाद के सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी समेत दर्जनों गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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