Ranchi : झारखंड की माटी में बसे कलाकारों की पुकार आज फिर गूंज उठी। “अपनों को ही मंच क्यों नहीं?”
झारखंड चैम्बर भवन में फिल्म, कला एवं संस्कृति उप समिति की बैठक में राज्यभर के फिल्म निर्माता, कलाकार और सांस्कृतिक प्रतिनिधि जुटे। बैठक की एक आवाज थी, “झारखंडी फिल्मों को उसका हक मिले, हर दिन हर सिनेमाघर में एक शो सिर्फ क्षेत्रीय फिल्मों के लिये हो।” बैठक में कहा गया कि –हमारी धरती के कलाकार लाखों खर्च करके फिल्में बनाते हैं, लेकिन उसे दिखाने को एक स्क्रीन तक नहीं मिलती। ये सिर्फ अन्याय नहीं, बल्कि झारखंड की आवाज को दबाने की कोशिश है।” दुर्भाग्यवश राज्य के 12 जिलों में एक भी सिनेमाघर नहीं है! ऐसे में ब्लॉक हॉल, पंचायत भवन, सामुदायिक भवन जैसे स्थानों पर फिल्म दिखाने की मांग की गई, जिससे गांव-गांव तक न सिर्फ फिल्में, बल्कि सरकारी योजनाओं का प्रचार भी पहुंचे।
कलाकार बेरोजगारी के कगार पर
बैठक में बताया गया कि राज्य सरकार की फिल्म नीति में सब्सिडी का प्रावधान है, फिर भी आठ वर्षों से यह सुविधा बंद है। एक छोटी फिल्म को बनाने में 40-50 लाख का खर्च आता है, ऐसे में कलाकारों को सहयोग और टैक्स में छूट मिलना चाहिये। झारखंडी फिल्मों को टैक्स फ्री करने की भी जोरदार मांग की गई। बैठक में चैम्बर अध्यक्ष परेश गट्टानी, महासचिव आदित्य मल्होत्रा, बॉलीवुड एक्टर देवेश खान, कोल्हान फिल्म एंड म्यूजिक एसोसिएशन के सदस्य किशन अग्रवाल और राज्य के तमाम कलाकार व निर्माता मौजूद थे। सभी की एक आवाज, “झारखंड की बोली, झारखंड के लोग, झारखंड का पर्दा, अब ये हक मिलकर रहेंगे!”












