Chouparan(Krishna Paswan) : खतरनाक मोड़ों, तीखी ढलानों और अक्सर उजड़ते परिवारों की दास्तान बन चुकी दनुआ घाटी में अब सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिये NHAI ने रेड टॉपिंग तकनीक से सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया है। मध्य प्रदेश की तर्ज पर अपनाई जा रही यह तकनीक अब दनुआ घाटी में मौत की रफ्तार को थामने का काम करेगी। हथिया बाबा मंदिर से लेकर जोड़राही पुल तक का इलाका दनुआ घाटी का सबसे खतरनाक हिस्सा माना जाता है। यहीं सबसे ज्यादा हादसे होते रहे हैं। अब इसी जोन में प्राथमिकता के आधार पर लाल रंग की विशेष परत (रेड टॉपिंग) बिछाई जा रही है। जानकारों का कहना है कि इससे वाहनों की तेज रफ्तार पर ब्रेक लगेगा, वहीं, मोड़ों पर टायर की पकड़ भी मजबूत होगी। कोहरे और बारिश में होने वाले हादसों में भी बड़ी कमी आने की उम्मीद है। सुकून वाली बात यह है कि पिछले एक सप्ताह से यहां कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई, जिसे इस तकनीक का शुरुआती असर माना जा रहा है।
दनुआ घाटी में लगातार हो रही मौतों को लेकर हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल लंबे समय से गंभीर और सक्रिय रहे हैं। उन्होंने इस समस्या को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और NHAI के आला अधिकारियों से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। सांसद ने मंत्रालय को बताया था कि यह घाटी कब्रगाह बनती जा रही है। अब उसी पहल का नतीजा है कि जमीन पर काम शुरू हो चुका है। सांसद मनीष जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि दनुआ घाटी को अब तक ब्लैक स्पॉट घोषित नहीं किया जाना समझ से परे है। उन्होंने मांग की कि NHAI इसे अविलंब ब्लैक स्पॉट घोषित करे, ताकि आधुनिक तकनीक और बुनियादी सुधारों से सड़क हादसों पर स्थायी रोक लग सके। उनका कहना है कि हर हादसा सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक उजड़ता परिवार होता है। रेड टॉपिंग इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
क्या है रेड टॉपिंग तकनीक?
NHAI के PD मनोज पांडेय के मुताबिक, रेड टॉपिंग सड़क की ऊपरी सतह पर घर्षण बढ़ाती है। ब्रेक लगाने पर वाहन जल्दी और सुरक्षित रुकते हैं। लाल रंग कोहरे और रात में ड्राइवर को पहले से सतर्क करता है। सामान्य बिटुमेन से ज्यादा टिकाऊ और भारी वाहनों के लिये सुरक्षित है।








