राजेश सिंह
Ranchi : राज्य में कोरोना ने डराना शुरू कर दिया है। आलम यह है कि अस्पताल में बेड मिल जाए तो ऑक्सीजन नहीं। कहीं ऑक्सीजन है तो इंजेक्शन नहीं। इंजेक्शन है तो कीमत मनमानी। शायद यही वजह है कि एसएसपी तक को इश्तेहार निकालना पड़ा। कालाबाजारी करने वाला कोई अबतक नहीं धरा गया। श्मशानों में लगी रहती है लंबी लाइन। अब तो मोहल्ले में ही अंतिम संस्कार करने की तस्वीरें वायरल होने लगी है।
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छोटे बड़े कई सामाजिक और गैर सामाजिक संगठनों में काबिज जिम्मेदार लोगों का कहना है कि राजधानी में सिस्टम पूरी तरह से धवस्त है। डीसी-एसएसपी तक को सड़कों पर निकल कर हाथ जोड़ना पड़ा। हैरानी तब हुई- सबको पता था करीब 1700 लोग आने वाले हैं। मजिस्ट्रेट भी तैनात कर दिये गये। इन मुसाफिरों का करना था कोरोना टेस्ट और तब भेजना था उन्हें उनके घर। एक मुसाफिर का भी नहीं हो पाया टेस्ट। मुसाफिरों रांची रेलवे स्टेशन में तैनात मजिस्ट्रेट और पुलिस बल को धकियाते हुए निकल पड़े अपने मंजिल की ओर। चिंता यह सता रही है कि महानगरों और शहरों से फुदकते-फुदकते यह महामारी गांव तक न पहुंच जाए। कुछ दिन पहले की बात है स्वास्थ्य मंत्री के सामने सदर अस्पताल परिसर में कोरोना पॉजिटिव एक मरीज की तड़प-तड़पकर एंबुलेंस में ही जान चली गई। परिवार वाले रोते-चीखते रहे। दिल किसी का नहीं पसीजा। इस मौत के बाद कुछ देर के लिए हाय-तौबा जरूर मची। अस्पतालों में नोडल अफसर तैनात कर दिये गये। पर न तो कोई दिखते हैं और ना ही हो पाया इलाज का मुकम्मल इंतजाम। लोगों ने कहा- कि अब अगर जीना है तो खुद जागना पड़ेगा, क्योंकि यहां देखने, रोकने और टोकने वाला कोई माई-बाप नहीं। कल शास्त्री मार्केट ने स्वत: एक सप्ताह के लॉकडाउन की घोषणा कर दी। वहीं आज सचिवालय संघ ने 5 दिन का सेल्फ लॉकडालन किया है। साथ ही झारखंड स्टेट बार काउंसिल भी एक सप्ताह तक काम नहीं करेगा। सेल्फ लॉकडाउन और होम आइसोलेशन पर फोकस करने के इरादे से कल कई संगठनों के जिम्मेदार लोग गोलबंद होंगे। आपस में बैठक करेंगे। नतीजा क्या आएगा यह तो वक्त बतायेगा।








