Kohramlive : सनातन परंपरा में शारदीय नवरात्रि का अपना अलग महत्व है। इस साल यह पावन पर्व 22 सितंबर 2025 (सोमवार) से शुरू होकर नौ दिनों तक चलेगा। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान साधक अगर श्रद्धा और नियम से मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करें और हर दिन माता को उनका प्रिय भोग अर्पित करें, तो साधक को सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सिद्धि का आशीर्वाद मिलता है। झारखंड-बिहार और उत्तर भारत में नवरात्रि के दौरान लोग गांव-गांव में मां के मंदिरों में विशेष भोग चढ़ाते हैं। देसी घी, शुद्ध गुड़, घर में बनी खीर और नारियल का प्रसाद यहां की पहचान है। मान्यता है कि स्थानीय अनाज और देसी मिठाइयों का भोग माता को अधिक प्रिय होता है। आइये जानें, कौन से दिन किस देवी को क्या भोग चढ़ाने से मिलता है विशेष फल—
नवरात्रि के नौ दिनों का भोग विधान
पहला दिन – मां शैलपुत्रीः भोग: घी। फल: सुख-सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान।
दूसरा दिन – मां ब्रह्मचारिणीः भोग: मिश्री या शक्कर। फल: दीर्घायु, साधना में सफलता और सभी इच्छाओं की पूर्ति।
तीसरा दिन – मां चंद्रघंटाः भोग: दूध से बनी मिठाई (खीर, बर्फी)। फल: दुख और संकट दूर, जीवन में शांति और साहस।
चौथा दिन – मां कुष्मांडाः भोग: मालपुआ। फल: बुद्धि, विवेक और रचनात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद।
पांचवा दिन – मां स्कंदमाताः भोग: केले। फल: पारिवारिक सुख-शांति और संतान की उन्नति।
छठा दिन – मां कात्यायनीः भोग: शहद। फल: वैभव, यश और सम्मान की प्राप्ति।
सातवां दिन – मां कालरात्रिः भोग: गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई। फल: भय, बाधा और शत्रु नाश।
आठवां दिन – मां महागौरीः भोग: नारियल या नारियल की मिठाई। फल: घर-परिवार में समृद्धि और सौभाग्य।
नौवां दिन – मां सिद्धिदात्रीः भोग: हलवा-पूरी और चने। फल: कार्यों में सिद्धि, मनोकामना पूर्ति और सर्वत्र विजय।








