Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम की धरती इन दिनों कराह रही है। जंगल से निकलकर गांवों में उतरे जंगली हाथी ने ऐसा कहर बरपाया है कि मासूम बचपन, सुहाग और बुढ़ापे की लाठियां, सब एक साथ टूट गईं। नोवामुंडी और हाटगम्हरिया में हाथी के हमलों ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। 6 जनवरी की रात करीब 10 बजे, जेटेया थाना क्षेत्र के बाबरिया गांव में नींद के सन्नाटे को हाथी की चिंघाड़ ने तोड़ दिया। घरों में सो रहे लोगों पर हाथी ने हमला कर दिया। इस दर्दनाक घटना में पति-पत्नी, उनके दो मासूम बच्चे और परिवार का एक अन्य सदस्य, कुल पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। एक बच्चा किसी तरह भागकर जान बचाने में सफल रहा, लेकिन उसके सामने ही उसका पूरा संसार उजड़ गया। दूसरी घटना हाटगम्हरिया क्षेत्र की है, जहां हाथी के हमले में एक ग्रामीण की मौत हो गई, जबकि दो लोग बेतरह घायल हैं। चाईबासा के DFO आदित्य नारायण ने मीडिया को बताया कि बार-बार जागरूकता अभियान चलाये जाने के बावजूद कई लोग खुले में सो रहे थे, जिससे यह हादसे हुये।
वन विभाग की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में गश्त कर रही हैं। ड्रोन से निगरानी की जा रही है। गांवों वालों को अलर्ट मोड में रहने को कहा गया है। जंगली हाथी के मूवमेंट पर पल-पल नजर रखी जा रही है। DFO के मुताबिक हाथी तेजी से अपना लोकेशन बदल रहा है, जिससे उसे ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है। पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ टीम बुलाई गई है। वहीं, वन्यजीव संरक्षण संगठन ‘वनतारा’ से भी संपर्क किया गया है, ताकि हाथी को ट्रेंकुलाइज कर काबू में लिया जा सके। मृतकों के नाम सनातन मेराल उसकी पत्नी जोंकों कुई, उनके दो मासूम बच्चे बताये गये।









