DHANBAD : रांची सेंट्रल जेल के अंदर से चली गुगली में धनबाद में नीरज तिवारी का विकेट गिरा था। फरमान जारी हुआ था कि चार दिन में नीरज तिवारी का राम नाम सत्य हो जाना चाहिये। शूट आउट करने के लिये बनारस से पेशेवर शूटर आशीष रंजन और अमर रवानी को बुलाया गया था। वहीं वारदात के दिन शूटर शुभम भी था। शूटरों को ठहराने और उसका ख्याल रखने का जिम्मा दिलीप यादव को दिया गया था। वहीं नीरज तिवारी को सलटा देने की पूरी फिलडिंग रौनक गुप्ता ने तैयार की थी। पहले से तय योजना के मुताबिक बीते 2 सितम्बर को नीरज तिवारी को धनबाद के कतरास इलाके में मार डाला गया। इस कांड में अबतक पकड़े गये सात लोगों से पूछताछ और मिले सबूत के बाद यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है। रांची के बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में बंद कुख्यात अमन सिंह गैंग को यह शक था कि कभी उनका दोस्त रहा नीरज गद्दार हो गया है। वह पुलिस का मददगार बन गया है। नतीजा गैंग के कई लोग पुलिस के जाल में फंस गये। अमन सिंह गैंग उससे बहुत खफा था। धनबाद के एसएसपी संजीव कुमार ने खुलासा किया कि रौनक गुप्ता और नीरज पहले दोस्त थे। नीरज भी अमन सिंह गिरोह में था। बाद में दोनों एक दूसरे के जानी दुश्मन बन गये। रौनक कुख्यात अमन सिंह का करीबी है।
रौनक गुप्ता करीब आठ दस माह पहले जेल गया था। वहां उसकी दोस्ती अमन सिंह गैंग के रवि ठाकुर, शुभम यादव, चंदन यादव और दिलीप यादव से हुई। वहीं जेल में ही नीरज तिवारी एवं अमन सिंह में दोस्ती हुई थी। जेल के अंदर नीरज ने यह गछा था कि बाहर निकलने के बाद वह बड़े व्यापारियों का मोबाइल नंबर देगा। रेकी भी करेगा, पर वह बाहर आते ही वह अपने वादे से मुकर गया। इसके बाद ही यह फरमान जारी हुआ कि जो जेल से पहले छूटेगा वह शूटर आशीष रंजन उर्फ छोटू एवं अमर रवानी को लोकेशन देगा। किसी भी हालत में चार दिन में नीरज को जान से मार देगा। जेल से निकलते ही रौनक अपने पुराने दोस्त नीरज से मिला। उसे खूब खिलाता पीलाता रहा। उसका दिल जीत लिया वारदात के दिन भी रौनक ने नीरज को शराब पिलाने के नाम पर बुला लिया।
रात करीब 8:15 बजे नीरज, रौनक और रोहित ने शराब पी। फिर तीनों चंद्रमा यादव के चाय दुकान पर गुटखा और सिगरेट लेने के लिए आ गए। दुकान के बाहर बेंच पर बैठकर सिगरेट पीने लगे। उसी समय शूटर आशीष रंजन और शुभम दोनों वहां बाइक से वहां पहुंच गये। बाइक चला रहे शुभम ने नीरज तिवारी के सामने बाइक रोक दी। पीछे बैठे आशीष रंजन को पिस्टल निकालते हुये नीरज तिवारी ने देख लिया। वह भागा, पर उसे कोई मौका नहीं दिया गया। उसे ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार कर दी गई। इसी भागम-भाग में दो गोली रोहित को दो और रौनक के हाथ में एक गोली लग गई। गोली चलाकर आशीष और शुभम भाग निकले। आसपास के लोगों की भीड़ जुटने लगी तो रौनक घबरा गया। पकड़े जाने के भय से रौनक भी अपनी पिस्टल वहीं फेंकना चाह रहा था, पर उसी समय भीड़ में दिलीप यादव भी पहुंच गया। रौनक ने चुपके से छिपाकर अपना पिस्टल दिलीप यादव को दे दिया। रोहित गुप्ता गोली लगने से घबरा गया और पास की गली की ओर भाग गया। भीड़ देखकर रौनक और रोहित भी नाटक करने लगे कि हम सबको गोली मार दिया।
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