Ramgarh : दिशोम गुरु, झारखंड के जननायक, शिबू सोरेन अब सिर्फ यादों में रह गये। आज उनके अस्थि कलश को CM हेमंत सोरेन ने नेमरा गांव से लेकर रजरप्पा स्थित दामोदर नदी के पावन घाट तक पहुंचाया। ग्रामीण परंपराओं और रीति-रिवाजों के बीच स्थानीय पाहन ने मंत्रोच्चार किया और बेटे ने पिता की अस्थियां जलधारा को समर्पित कीं। नम आंखों से जब हेमंत सोरेन ने कलश थामा, तो लगा जैसे पूरा झारखंड उस शोक और गर्व की लहर में डूबा हो।
नदी की धाराओं में बहते कलश के संग बह गईं अनगिनत यादें, संघर्ष की कहानियां, आदिवासी अस्मिता की आवाज और झारखंड आंदोलन की गूंज। इस भावुक क्षण में छोटे भाई बसंत सोरेन, परिजन और नेमरा ग्रामवासी भी साथ खड़े थे।
गुरुजी अब भले ही साकार रूप में न हों, पर उनकी विरासत, झारखंड की मिट्टी और लोगों के दिलों में—हमेशा जिंदा रहेगी।
CM ने अपने ‘X’ हैंडल पर पोस्ट किया कि “अंतिम जोहार बाबा… स्मृति शेष बाबा दिशोम गुरुजी की पवित्र अस्थियों को ऐतिहासिक रजरप्पा स्थित दामोदर नदी में विसर्जित किया। प्रकृति का प्यारा लाल, प्रकृति में समा गया। प्रकृति का अंश बनकर वह समस्त झारखंडवासियों और झारखण्डियत की रक्षा करते रहेंगे, हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। वीर दिशोम गुरुजी शिबू सोरेन अमर रहें! वीर दिशोम गुरुजी शिबू सोरेन जिंदाबाद! जय झारखण्ड!”













