- जनजातीय साहित्योत्सव का आगाज हुआ
- जंगल-पहाड़ बचाने का वक्ताओं ने दिया संदेश
रांची : राजधानी Ranchi में राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य उत्सव अखड़ा शुरू हुआ। तीन दिवसीय इस साहित्योत्सव की शुरुआत राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित राज्य संग्रहालय में हुई। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग समाज कल्याण विभाग और टीआरआई के सहयोग से उत्सव का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र में झारखंड के साहित्यकार महादेव टोप्पो की कविता संग्रह लेशंस फ्रॉम फॉरेस्ट एंड माउंटेन के अंग्रेजी अनुवाद का लोकार्पण हुआ।
महादेव टोप्पो की कविता संग्रह का लोकार्पण
इस अवसर पर महादेव टोप्पो ने अपनी कविता के बारे में बताया कि इसमें 44 कविताएं हैं। यह कविता संग्रह जंगल और पहाड़ों को संरक्षित करने का संदेश देती है, जो विकास की अंधी दौड़ में गुम होते जा रहे हैं। अगले वक्ता के रूप में कविता संग्रह का अंग्रेजी में अनुवाद करने वाले डॉ संतोष कुमार सोनकर ने ऑनलाइन अपनी बात रखी।
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महादेव टोप्पो ने कहा कि आज का दौर विकास की अंधी दौड़ का है, लेकिन हमें सस्टेनेबल डेवलपमेंट की ओर जाना चाहिए, जिससे कि जल जंगल और पहाड़ जैसी चीजों का नुकसान न हो। युवा साहित्यकार समीर भगत ने कहा कि विकास की इस दौड़ में हम दुर्घटना और बीमारियों के ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इकोलॉजिकल बैलेंस खत्म हो रहा है। इसके संरक्षण की आवश्यकता है।
Ranchi में हुए कार्यक्रम का डॉ रणेंद्र ने किया संचालन
मौके पर डॉ मिथिलेश ने पुस्तक के बारे में अपने विचार रखते हुए कहा कि या पुस्तक आदिवासी संघर्ष की बात कहता है। साथ ही आदिवासी और आदिवासियों को बचाने के लिए संघर्ष जारी रखने की बात भी कहता है। हमें इस पर सोचना चाहिए। महादेव टोप्पो ने कविता के जरिए व्यापक संदेश दिया है। कार्यक्रम का संचालन टीआरआई के निदेशक डॉ रणेंद्र ने की।
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