Ranchi : रांची रेलवे स्टेशन पर प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को समय पर नहीं मिल पाया था डॉक्टर। समय पर चिकित्सा सुविधा और एंबुलेंस नहीं मिलने से महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की हो गई थी मौत। इस मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता लिया है। आयोग ने रेलवे से पूछा है कि जब महिला को सुबह 4 बजे प्रसव पीड़ा हुई तो डेढ़ घंटे तक कोई इंतजाम क्यों नहीं किया गया। उसके बच्चे की मौत का जिम्मेवार कौन है।
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क्या है मामला
बिहार के नवादा जिले के मोरमा निवासी काजल कुमारी पति रंजन कुमार और अपने 3 वर्षीय बच्चे के साथ एलेप्पी धनबाद स्पेशल ट्रेन 03352 के कोच नंबर S -11 के बर्थ नंबर 58 और 64 पर सफर कर चेन्नई से धनबाद जा रही थी। इसी दौरान हटिया स्टेशन से पहले शनिवार 26 जून 2021 की सुबह 4:00 बजे काजल कुमारी को प्रसव पीड़ा हुई। करीब डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक महिला ट्रेन में तड़पती रही। सुबह 5:20 बजे ट्रेन रांची स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर पहुंची तो एक यात्री के ने आरपीएफ के एएसआई धीरेंद्र कुमार को सूचना दी गई। एएसआई धीरेंद्र कुमार ने “मेरी सहेली” की टीम के साथ महिला को स्ट्रेचर के सहारे प्लेटफार्म पर उतारा और रेलवे के अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी। काफी देर तक प्लेटफार्म पर ना तो एंबुलेंस पहुंचा और ना ही मेडिकल की कोई टीम पहुंची। तब आरपीएफ के अधिकारियों ने गर्भवती काजल कुमारी को ऑटो से रिम्स भेज दिया। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ऑटो से रिम्स जाते समय रास्ते में ही बच्चे का शरीर गर्भ से बाहर आ गया था और सिर अंदर फंसा रह गया था। जब काजल कुमारी रिम्स पहुंची तो डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।








