Ranchi : बाहर बारिश की फुहारें थीं, भीगते पत्तों से टपकती बूंदें जैसे किसी बड़ी बात का संकेत दे रही थीं। लेकिन भीतर, समाहरणालय भवन, रांची के एक सभागार में आज सिर्फ मौसम ही नहीं, अफसरों की धड़कनें भी भीग रही थीं। रांची के DC मंजूनाथ भजंत्री की आंखों में आज धूप नहीं थी, बादल भी नहीं, बस वह तूफान था जो अक्सर तब उठता है, जब भरोसे की नींव हिलती है। समीक्षा बैठक चल रही थी, DC बोले, “क्या योजनाएं अब सिर्फ फाइलों की मल्लिका बनकर रह जायेंगी? क्या जनहित अब टेंडर और निविदाओं के जाल में उलझ कर दम तोड़ देगा?” अचानक, तभी DC ने पूछा “NREP-1 के अभियंता सागर प्रताप कहां हैं?””…सर, उनका मोबाइल स्विच ऑफ है,” यह सुनते ही DC उखड़ गये और बोले, “मोबाइल बंद? जब जिम्मेदारी खुले में है तो फोन क्यों बंद है?” यह कोई डांट नहीं थी, यह वह चोट थी जो अधिकारियों की आत्मा तक जा पहुंची।
एक के बाद एक पर्दे उठे, PM-ABHIM के 78 योजनाओं में 19 अब भी अधूरी थीं, MPLADS फंड के खाते अब तक बंद नहीं हुये थे, DMFT की योजनाएं अधर में थीं, निविदाएं, एकरारनामे और ऑडिट सब जैसे किसी गहरी नींद में थे, हर योजना जैसे चीख-चीख कर कह रही थी कि “हमें सिर्फ कागजों में मत जियो, जमीन पर चलकर देखो, जहां वादा अधूरा है।” इसके बाद DC मंजूनाथ भजंत्री ने आदेश दिया कि “अब कोई भी योजना बिना सत्यापन के भुगतान नहीं पायेगी। अब कोई भी अफसर ‘अनजान’ बनकर बच नहीं पायेगा। वहीं, जो योजना अधूरी होगी, उस पर कार्रवाई पूरी होगी।” मतलब साफ था कि अब हर फाइल के पीछे एक चेहरा होगा, एक जवाबदेही।
DC मंजूनाथ भजंत्री ने सिविल सर्जन से 108 टॉल फ्री एम्बुलेंस की स्थिति की जानकारी लेते हुये कहा कि ऐसे एम्बुलेंस जो जो MP, MLA फंड एवं NGO द्वारा रांची जिला को दिये गये हैं, वैसे एम्बुलेंस को सदर अस्पताल एवं प्रखंड के अस्पताल से टैग करें। वहीं. जिला में चल रही सभी योजनाओं की गुणवत्ता पर जोर देने को कहा। वहीं, किसी भी योजना के पूरा होने के बाद पूरी जांच करके ही भुगतान करें।






