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पारंपरिक राग के बीच ये बोल गये मंत्री चमरा लिंडा…

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Ranchi : रांची की मिट्टी, जहां हर साल सरहुल की खुशबू बिखरती है, वहां इस बार कुछ नया था। मायापुर सरना स्थल पर उमड़ा जनसैलाब सिर्फ उत्सव के रंग में नहीं, बल्कि अपनी धरोहर को बचाने की कसमें खाने आया था। नगाड़ों की थाप, मांदर की गूंज और पारंपरिक राग के बीच जब मंत्री चमरा लिंडा मंच पर आये तो पूरा वातावरण जोश और गर्व से भर गया।

मांदर-नगाड़े की धुन पर थिरकना होगा, डीजे की चीख पर नहीं

मंत्री लिंडा बोले, “संस्कृति बचानी है, तो अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा। मांदर की थाप, नगाड़े की गूंज और सरहुल के पारंपरिक गीत ही हमारी पहचान हैं। डीजे और आधुनिक गीतों की चकाचौंध में हम अपने अस्तित्व को खो देंगे। हम अपनी पहचान की लड़ाई लड़ेंगे। सरना कोड हमारा अधिकार है। अगर केंद्र सरकार इसे मान्यता नहीं देती, तो हम सड़कों पर उतरेंगे, पूरे झारखंड को ठप कर देंगे।” यह सुनकर वहां मौजूद हजारों की भीड़ गूंज उठी। आंखों में गर्व और होठों पर गीत थे। आदिवासी समाज के लोग इस आह्वान को अपने हृदय की गहराइयों में समेट रहे थे।

15 करोड़ की मांदर-नगाड़ा योजना

मंत्री चमरा लिंडा ने घोषणा की कि सरकार 15 करोड़ रुपये की लागत से मांदर और नगाड़े बांटेगी, ताकि सरहुल पर्व की आत्मा जीवित रहे। चमरा लिंडा का संदेश स्पष्ट था कि “संघर्ष ही जीवन है। अगर हमने आज अपने अस्तित्व को नहीं बचाया, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।”

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