Ranchi : लंदन की ठंडी फिजा में झारखंड की गर्माहट घुली, जब CM हेमंत सोरेन ने यूनाइटेड किंगडम में रोजगार कर रहे झारखंड-मूल के लोगों से आत्मीय संवाद किया। नर्स, केयरगिवर्स, घरेलू कर्मी और सेवा क्षेत्र से जुड़े प्रवासियों की आंखों में अपने राज्य के लिये वही अपनापन, वही जुड़ाव, जो हजारों मील की दूरी भी कम नहीं कर पाई। संवाद के दौरान प्रवासियों ने विदेशों में काम के अनुभव, चुनौतियां और उम्मीदें खुलकर साझा कीं। उनका कहना था कि वर्षों से यूके में रहते-बसते हुये भी झारखंड उनके संस्कारों, मूल्यों और पहचान में जीवित है, घर की मिट्टी की खुशबू आज भी सांसों में बसी है। CM हेमंत सोरेन ने सभी की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार द्वारा विदेशों में कार्यरत भारतीयों के लिये लाये जाने वाले कानूनी प्रावधानों का अध्ययन झारखंड सरकार करेगी। जैसे राज्य के भीतर श्रमिक अधिकारों की रक्षा होती है, वैसे ही विदेशों में रोजगार कर रहे झारखंड-मूल के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जायेगी।इस क्रम में मुख्यमंत्री ने यूके में भारत के राजदूत से भी बातचीत कर कामगारों के कल्याण का मुद्दा उठाया।
सम्मान, सुरक्षा और बेहतर अवसर, यही लक्ष्य
CM हेमंत सोरेन ने दो टूक कहा कि झारखंड सरकार विदेशों में कार्यरत झारखंड-मूल के नागरिकों की गरिमा, सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि विदेशों में रोजगार सम्मानजनक, सुरक्षित और अवसरों से भरा होना चाहिये। नर्सों, केयरगिवर्स और अर्ध-कुशल कामगारों का योगदान झारखंड की पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूत करता है। मौेक पर मौजूद रेनू लाकड़ा, अंजू लाकड़ा, सिस्टर ज्योति, फुलकारी एक्का, मार्था टोप्पो, मैरी खाखा, कॉसमोस कुजूर, तारा तिर्की, सरोज टोप्पो, प्लेसिडियस टोप्पो, एलिजाबेथ कुजूर, विजय कुजूर और जैसिंटा कुजूर, सबने मिलकर कहा, “दूरी चाहे जितनी हो, झारखंड दिल से दूर नहीं।”








