Garhwa(Nityanand Dubey) : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA), रांची के दिशा-निर्देशों के तहत गढ़वा थाना परिसर में एक विधिक जागरूकता शिविर का लगाया गया। यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) गढ़वा, मनोज प्रसाद तथा सचिव निभा रंजना लकड़ा के आदेश पर पूरा हुआ। शिविर के मुख्य अतिथि लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) नित्यानंद दुबे ने उपस्थित ग्रामीणों, कर्मचारियों और कैदियों को संबोधित करते हुये कहा कि न्याय सबके लिये है और संविधान यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी नागरिक आर्थिक कमी के कारण न्याय पाने से वंचित न रह जाये।
उन्होंने विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 39-ए का जिक्र किया, जो सभी नागरिकों को समान न्याय और मुफ्त विधिक सहायता की गारंटी देता है। दुबे ने कहा कि न्याय केवल साधन-संपन्न लोगों का अधिकार नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर, शोषित और वंचित तबकों को मुकदमे लड़ने में सहायता देना राज्य और विधिक प्राधिकरण का दायित्व है। उन्होंने DLSA को ऐसे लोगों के लिये “आशा की किरण” बताया। दुबे ने बताया कि निम्नलिखित वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता दी जाती है, महिलायें और बच्चे, अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य, प्राकृतिक आपदा के पीड़ित, औद्योगिक और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, वे नागरिक जिनकी वार्षिक आय निर्धारित सीमा से कम है। इनके लिये कोर्ट फीस, प्रक्रिया शुल्क और वकील की फीस पूरी तरह माफ होती है।
हाजत में बंद कैदियों को दी कानूनी जानकारी
शिविर के दौरान LADC नित्यानंद दुबे ने थाना हाजत में बंद तीन कैदियों से भी मुलाकात की और उन्हें विधिक सहायता हासिल करने का तरीका बताया। उन्होंने बताया कि कैदी चाहे किसी भी मामले में बंद हों, उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता पाने का मौलिक अधिकार है। मौके पर पीएलवी अजीत उरांव एवं SI आदित्य नायक सहित अन्य पुलिस पदाधिकारी तथा स्थानीय लोग उपस्थित थे।












