Bihar : मोतिहारी की हवा में आज कुछ खास था। मैदान खचाखच भरा था, लोग बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। और फिर, जैसे ही लालू यादव मंच पर आये, एक लहर दौड़ गई—जनता की, उम्मीदों की, बदलाव की। “अबकी बार बिहार की गद्दी पर तेजस्वी बैठिहें, एकर रोक सके, ई धरती पर कौनो माई के लाल नाहीं बा।” लालू यादव का यह गरजता बयान सुनकर भीड़ में जोश भर गया। सभा के बीच लालू ने तेजस्वी यादव की ‘माई बहिन मान योजना’ की जमकर तारीफ की। बोले – “ई योजना नारी सम्मान और सशक्तिकरण के लिये क्रांतिकारी कदम है। अब हर गांव-टोला में एके गूंज सुनाई देई।” महिलाओं के चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, मानो उनके सपनों को नया आसमान मिल गया हो। लालू का अंदाज़ वही पुराना, वही भोजपुरिया तेवर, बोले – “जे लोग अलबल बकते बा, ओकरे छोड़ दीं। जनता अब बदलाव चाहतिया, अउर बदलाव के नाम तेजस्वी यादव हउअन।” भीड़ में नारे गूंज उठे, लोग मुट्ठियां भींचकर समर्थन जताने लगे। राजद सुप्रीमो कोटवा के जसौली जमुनिया गांव पहुंचे थे, जहां विधायक मनोज यादव के दिवंगत पिता कामरेड यमुना यादव को श्रद्धांजलि दी। बोले – “यमुना बाबू संघर्ष के मिसाल रहलें, उनकर सपना अब पूरा करब।” लालू यादव के आते ही पूरा माहौल उनके रंग में रंग गया। उनके हर शब्द पर तालियां, हर बयान पर समर्थन की गूंज। सियासी बिसात बिछ चुकी है, मोहरे अपनी चाल चल रहे हैं, और बिहार की राजनीति एक नये मोड़ की ओर बढ़ रही है।






