Kohramlive : मकर संक्रांति—सनातन संस्कृति का वह पावन पर्व, जहां सूर्य उपासना, प्रकृति से संवाद और जीवन में संतुलन एक साथ उतर आते हैं। यह वही दिन है, जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और आकाश से धरती तक शुभता की रेखा खिंच जाती है। खगोलीय दृष्टि से खास, और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत फलदायी मकर संक्रांति हर अर्थ में मंगल का संकेत देती है। इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी (बुधवार) को मनाई जायेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दोपहर 2.49 बजे से शाम 5.45 बजे तक पुण्यकाल एवं दोपहर 2.49 बजे से 3.42 बजे तक महापुण्यकाल है। इन पलों में किया गया स्नान, दान, जप और सूर्य पूजन विशेष पुण्य प्रदान करता है। भारत के कोने-कोने में यह पर्व अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में मकर संक्रांति, गुजरात और महाराष्ट्र में उत्तरायण, तमिलनाडु में पोंगल, असम में माघ बिहू। मकर संक्रांति को पिता-पुत्र के पावन मिलन और भगवान विष्णु की असुरों पर विजय का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व सिखाता है कि अहंकार त्यागो, संतुलन साधो और धर्म के पथ पर आगे बढ़ो।









