रांची (पवन ठाकुर / राजेश सिंह) : “का बताएं बाबू… जब हमको मेरे पति की शहादत की खबर मिली तो मेरे तो पैरों तले से जमीन ही खिसक गई। मेरी तो दुनिया ही उजड़ चुकी थी। बदहवास मैं कुछ भी नहीं सोच पा रही थी। चिंता फिकर से दुनिया अंधार हो गया। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या-करें, क्या ना करें।” ये कहते हुए फफक पड़ीं कीर्ति चक्र विजेता विश्वा केरकेट्टा की बेवा। एक शहीद की बेवा का क्या है दर्द और किस बात को लेकर आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में।
20 अक्टूबर 1997 को देश की रक्षा में आतंकिवादियों से लड़ते हुए झारखंड के वीर सपूत विश्वा केरकेट्टा जम्मू कश्मीर में शहीद हो गए। अपनी शहादत से पहले दो खतरनाक आतंकियों को उन्होंने मौत के घाट उतार दिया। पति की शहादत के बाद भी पत्नी ने हिम्मत नहीं हारी। एकलौते बेटे को भी देश सेवा के लिए सेना में भेजा। मगर एक शहीद के परिवार को समाज और सरकार से जो सम्मान और सुविधा मिलनी चाहिए वह नहीं मिली।
11 साल तक शहीद की पत्नी ने बदहाली में अपना जीवन गुजारा और बेहद कठिनाई से अपने बच्चों का पालन पोषण किया। इस दौरान राज्य सरकार की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं मिली, जिसका उन्हें मलाल है। उर्मिला केरकेट्टा यह कहते हुए फफक पड़ीं कि हमारे पति तो देश के लिए शहीद हुए थे। मगर सरकार ने उनकी शहादत का ऐसा सिला दिया कि 11 साल तक मैं लाचारी और बेबसी का जीवन जीती रही। इस दौरान सेना ने परिवार का साथ नहीं छोड़ा। समय-समय पर मदद और सम्मान दिया। पति की शहादत के 12वें साल राष्ट्रपति की अनुशंसा पर कांके अंचल कार्यालय में फोर्थ ग्रेड कर्मचारी के पद पर नौकरी मिली। शहीद विश्वा केरकेट्टा की बेवा उर्मिला केरकेट्टा का कहना है कि उन्हें अब किसी से कुछ नहीं चाहिए। भगवान का दिया हुआ सब कुछ है। सरकार केवल उचित सम्मान दे, वही ही काफी है।
विश्वा केरकेट्टा की शहादत के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ केआर नारायणन ने सन 2000 में कीर्ति चक्र से उनको सम्मानित किया। राष्ट्रपति की अनुशंसा पत्र के आधार पर 23 अक्टूबर 2009 को कांके अंचल कार्यालय में फोर्थ ग्रेड कर्मचारी के पद पर नौकरी मिली। जहां आने-जाने में काफी परेशानी होती थी। तीन साल तक वहां काम करने के बाद अधिकारियों से मिन्नत कर नामकुम अंचल कार्यालय में उर्मिला केरकेट्टा ने अपना ट्रांसफर कराया।
बेटी का छलका दर्द
पिता की शहादत पर बेटी ने कहा कि शहादत के समय वह बहुत छोटी थी। मां ने काफी मेहनत और संघर्ष कर उसे और उसके भाई को पाला है। पिता की शहादत पर गर्व तो है, मगर दिल में एक टीस जरूर उठती है कि एक शहीद के परिजन को मिलने वाला सम्मान उन्हें नहीं मिला।
क्या है कीर्ति चक्र
कीर्ति चक्र भारत का शांति के समय वीरता का पदक है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह मरणोपरान्त भी दिया जा सकता है। वरीयता में यह महावीर चक्र के बाद आता है।
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