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जंगल के बादशाह एनका*उंटर में ढेर, क्या बोल गये DGP… देखें वीडियो

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Ranchi (Pawan Thakur) : चतरा, पलामू और गया में आतंक की गाथा लिखने वाले खूंखार माओवादी गौतम पासवान और अजीत उर्फ चार्लिस पुलिस एनका*उंटर में ढेर हो गया। मारक दस्ता के टॉप कमांडर गौतम और अजीत को जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर 25-25 लाख रुपये का इनाम रखा गया था। मुठभेड़ में मारक दस्ता के अमर गंझू, अजय यादव उर्फ नंदु और संजीत भुंईया भी मारे गये। ये तीनों सब जोनल कमांडर स्तर के माओवादी थे।

झारखंड पुलिस को यह बेहतरीन कामयाबी चतरा के लावालौंग के जंगल में हुए एनकाउंटर में मिली। दोनों तरफ से अंधाधुंध फायरिंग की गई। माओवादियों के मूवमेंट की खबर पर पुलिस जंगल में घुसी थी। पुलिस को देखते ही मारक दस्ता के माओवादियों ने पुलिस पर गोलियों की बौछार शुरू कर दी। नक्सलियों ने अत्याधुनिक हथियार जैसे AK-47, इंसास और रेगुलर रायफल का खुलकर इस्तेमाल किया। वहीं, पुलिस ने भी मोर्चा संभाल मुंहतोड़ जवाब दिया। पुलिस को भारी पड़ता देख बाकी नक्सली भाग निकले। एनका*उंटर के बाद सर्च अभियान के क्रम में जंगल में पांच डेड बॉडी मिली। वहीं, 2 AK-47, एक इंसास, दो रायफल, जिन्दा गोलियां और कुछ खोखे मिले। मुठभेड़ में एक साथ 5 टॉप माओवादियों के मारे जाने की फैली खबर के बाद झारखंड पुलिस का इकबाल बुलंद है। मुठभेड़ में शामिल पुलिस अफसर और सुरक्षाबलों की बांछे खिली हुई है। नये डीजीपी अजय कुमार सिंह की देखरेख में चले इस ऑपरेशन में झारखंड पुलिस को यह यादगार और बेहतरीन कामयाबी मिली है।

मारा गया अजीत उर्फ चार्लिस माओवादी संगठन को मजबूत बनाने में लगा हुआ था। वहीं नक्सलियों को उच्च तकनीकों के बारे में ट्रेंड किया करता था। दिमाग से कुसाग्र चार्लिस रॉकेट लांचर तक बना चुका था। वह अब मिसाइल बनाने की तैयारी में जुटा हुआ था। वह हथियार चलाने में भी माहिर था। उसकी अगुवाई में कई संगीन जुर्म को नक्सलियों ने अंजाम दिया। उसके नाम झारखंड और बिहार के कई थानों में 50 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज हैं। वह मोस्ट वांटेड था। झारखंड पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था। एक साथ 5 टॉप माओवादी कमांडर के मारे जाने से नस्कलियों को गहरा झटका लगा है। पुलिस का दावा है कि मुठभेड़ में ढेर सभी माओवादी चतरा, पलामू और गया के इलाकों में एक्टिव थे। इस मारक दस्ता पर इल्जाम है कि साल 2025-16 में जहानाबाद में सुरक्षाबलों पर घातक हमला किया था। जिसमें दस जवान शहीद हो गये थे। इस मारक दस्ता की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि यह लोग लैंड माइंस बिछाने में माहिर थे। जानकार बताते हैं कि अजीत और गौतम ऐसा माओवादी था जिसका निशाना कभी चूका नहीं करता था। वहीं, दोनों लैंड माइंस बिछाने में भी माहिर थे। संगठन में भी इनका औदा बड़ा था। शीर्ष माओवादी नेता भी इनसे सलाह मशविरा लिया करते थे। सुनें क्या बोले झारखंड के डीजीपी अजय कुमार सिंह…

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